लोदी वंश(1451 से 1526 ई.)
लोदी वंश का संस्थापक बहलोल लोदी था। वह 19 अप्रैल, 1451 को बहलोल शाहगाजी की उपाधि से दिल्ली के सिंहासन पर बैठा। दिल्ली पर प्रथम अफगान राज्य की स्थापना का श्रेय बहलोल लोदी को दिया जाता है। बहलोल लोदी ने बहलाल सिक्के का प्रचलन करवाया। यह अपने सरदारों को 'मकसद-ए-अली' कहकर पुकारता था। वह अपने सरदारों के खड़े रहने पर स्वयं भी खड़ा रहता था।
बहलोल लोदी का पुत्र निजाम खाँ 17 जुलाई, 1489 ई. में 'सुल्तान सिकन्दर शाह' की उपाधि से दिल्ली के सिंहासन पर बैठा।
1504 ई. में सिकन्दर लोदी ने आगरा शहर की स्थापना की।
भूमि के लिए मापन के प्रामाणिक पैमाना गजे सिकन्दरी का प्रचलन सिकन्दर लोदी ने किया।
'गुलरुखी' शीर्षक से फारसी कविताएँ लिखने वाला सुल्तान सिकन्दर लोदी था।
सिकन्दर लोदी ने आगरा को अपनी नई राजधानी बनाया। इसके आदेश पर संस्कृत के एक आयुर्वेद ग्रंथ का फारसी में फरहेंगे सिकन्दरी के नाम से अनुवाद हुआ। इसने नगरकोट के ज्वालामुखी मंदिर की मूर्ति को तोड़कर उसके टुकड़ों को कसाइयों को मांस तीलने के लिए दे दिया था। इसने मुसलमानों को ताजिया निकालने एवं मुसलमान स्त्रियों को पीरों तथा संतों के मजार पर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया।
गले की बीमारी के कारण सिकन्दर लोदी की मृत्यु 21 नवम्बर, 1517 ई. को हो गयी। इसी दिन इसका पुत्र इब्राहिम 'इब्राहिम शाह' की उपाधि से आगरा के सिंहासन पर बैठा।
संभवतया दिल्ली के सुल्तानों में सिकन्दर लोदी प्रथम सुल्तान था जो हिन्दुओं के त्योहारों मुख्यतया होली में भाग लेता था।
नोट:- दिल्ली की मोठ मस्जिद सिकन्दर लोदी के प्रधानमंत्री (बजीर) मियां भोइया ने 1505 ई. में बनवाई थी।
21 अप्रैल, 1526 ई. को पानीपत के प्रथम युद्ध में इब्राहिम लोदी बाबर से हार गया। इस युद्ध में यह मारा गया।
बाबर को भारत पर आक्रमण के लिए निमंत्रण पंजाब के शासक दौलत खाँ लोदी एवं इब्राहिम लोदी के चाचा आलम खाँ ने दिया था।
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