मारवाड़ का राठौड़ वंश एवं इस वंश के प्रतापी शासक मारवाड़ की उत्पत्ति मारवाड़ शब्द 'मरु' और 'माड' इन दो शब्दों के संयोग से बना है। मरु और माड ये दो देश भिन्न-भिन्न नाम से प्रसिद्ध हैं। जैसलमेर का देश माड और उससे पूर्व का प्रदेश मरु, जिसमें मालानी आदि प्रदेश हैं। मरु और माड इन दोनों देशों की सीमाएँ परस्पर मिली हुई होने से 'मरुमाड' शब्द बना। उसी मरुमाड शब्द का अपभ्रंश रूप 'मारवाड़' है। जैसे 'मेदपाट' शब्द का अपभ्रंश 'मेवाड़' हो गया, वैसे 'मरुपाट' का 'मारवाड़' शब्द बन गया। पाट शब्द का अर्थ विस्तार है। मरुपाट अर्थात् मरु देश का विस्तार । संस्कृत भाषा में मारवाड़ देश का नाम मरु मिलता है और इसका अर्थ यह है कि वह देश जिसमें प्राणी जल के अभाव में मर जाय। जिस प्रकार दक्षिणी-पश्चिमी राजस्थान के गुहिलों का शासन मेवाड़ और वागड़ प्रांत में स्थापित हुआ, उसी प्रकार राजस्थान के उत्तरी तथा पश्चिमी भागों में राठौड़ों के राज्य भी स्थापित हुए। मारवाड़ को 'मुरधर' देश भी कहते हैं। 'मुरधर' शब्द मरुधरा का अपभ्रंश है। मरुधरा अर्थ...