राजस्थान की सांस्कृतिक परम्परा : एक परिचय राजस्थानी संस्कृति एक बहता झरना है जो किसी भी निवासी अथवा पर्यटक के मन को उल्लासित एवं तरंगित कर सकता है। राजस्थान में रहने वाले निवासियों का सौभाग्य है कि वे यहाँ की मिट्टी की खुशबू को अनुभूत करते हैं जो भक्ति और शक्ति को स्वयं में समाहित किए हुए है। इस प्रदेश की संस्कृति को जीवंत बनाये रखने का श्रेय यहाँ के जन-सामान्य, राजा-राणा, सामन्त, जागीरदार, कलाविदों-साहित्यकारों, रण-बाँकुरों, शिल्पकारों एवं आश्रयदाताओं आदि सभी को है। उन सबके प्रति आभारी रहना ही रचनात्मकता एवं सांस्कृतिक रचनाधर्मिता से हमारा उऋण होना सम्भव है। राजस्थान के निवासियों ने प्राक् ऐतिहासिक काल से ही अपने मस्तिष्क की प्रतिकृति की छाप काल-खण्ड पर छोड़ी है। कालीबंगा, गणेश्वर, आहड़, नोह आदि स्थानों से प्राप्त सांस्कृतिक अवशेषों को शायद अभिव्यक्ति की जरूरत नहीं है क्योंकि वे स्वयं बोलते हैं। राजस्थान में मानव की विकास यात्रा में सांस्कृतिक वैभव एवं शैल्पिक परम्परा का ख़जाना भरा पड़ा है। यहाँ का इतिहास विविधता के रंग को अपने अंक में समेटे हुए है। राजस्थान की सांस्कृतिक परम्पर...