सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

RBSE Book लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मारवाड़ का राठौड़ वंश

  मारवाड़ का राठौड़ वंश एवं इस वंश के प्रतापी शासक मारवाड़ की उत्पत्ति मारवाड़ शब्द 'मरु' और 'माड' इन दो शब्दों के संयोग से बना है। मरु और माड ये दो देश भिन्न-भिन्न नाम से प्रसिद्ध हैं। जैसलमेर का देश माड और उससे पूर्व का प्रदेश मरु, जिसमें मालानी आदि प्रदेश हैं। मरु और माड इन दोनों देशों की सीमाएँ परस्पर मिली हुई होने से 'मरुमाड' शब्द बना। उसी मरुमाड शब्द का अपभ्रंश रूप 'मारवाड़' है। जैसे 'मेदपाट' शब्द का अपभ्रंश 'मेवाड़' हो गया, वैसे 'मरुपाट' का 'मारवाड़' शब्द बन गया। पाट शब्द का अर्थ विस्तार है। मरुपाट अर्थात् मरु देश का विस्तार । संस्कृत भाषा में मारवाड़ देश का नाम मरु मिलता है और इसका अर्थ यह है कि वह देश जिसमें प्राणी जल के अभाव में मर जाय। जिस प्रकार दक्षिणी-पश्चिमी राजस्थान के गुहिलों का शासन मेवाड़ और वागड़ प्रांत में स्थापित हुआ, उसी प्रकार राजस्थान के उत्तरी तथा पश्चिमी भागों में राठौड़ों के राज्य भी स्थापित हुए। मारवाड़ को 'मुरधर' देश भी कहते हैं। 'मुरधर' शब्द मरुधरा का अपभ्रंश है। मरुधरा अर्थ...

गुहिल वंश

⚔️⚔️  गुहिल वंश ⚔️⚔️ उदयपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ तथा इनके आस-पास का क्षेत्र मेवाड़ कहलाता था। गुहिल वंश ने मुख्यतः मेवाड़ में शासन किया। इस वंश का नामकरण इस वंश के प्रतापी शासक ' गुहिल' के नाम से हुआ। गुहिल वंश की उत्पत्ति और मूल स्थान के बारे में अनेक मत प्रचलित हैं ।  अबुल  फजल इन्हें ईरान के शासक नौशेखाँ से संबंधित करता है, तो  कर्नल टॉड इन्हें वल्लभी के शासकों से संबंधित मानता है,  डी.आर. भण्डारकर   ब्राह्मण वंश का बताते हैं क्योंकि बप्पा के लिए विप्र शब्द का प्रयोग किया गया है, जैसा कि आहड़ (Ātpur) के शिलालेख में उल्लेखित है। वहीं नैणसी आदि रूप में ब्राह्मण व जानकारी से क्षेत्रीय, जबकी गोपीनाथ शर्मा इनके ब्राह्मण होने का मत प्रतिपादित करते हैं।  गुहिल वंश की उत्पत्ति :- डॉ. गौरीशंकर हीराचन्द ओझा इन्हें सूर्यवंशी मानते हैं जो पुराणों के समय से चले आ रहे हैं। उनके अनुसार राजा गुहदत्त, जो गुहिलोत वंश के आदिपुरुष थे, स्वयं ‘विप्र’ नहीं थे, बल्कि वे आनंदपुर से आए ब्राह्मणों के ‘आनंददाता’ अर्थात् “उनके लिए आनंद देने वाले” थे। आहड़ के ...