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फ़ज़ल अली आयोग (29December 1953)

 एस. फ़ज़ल अली आयोग (29December 1953) 1. परिचय 22 दिसंबर, 1953 को प्रधानमंत्री ने संसद में यह वक्तव्य दिया कि राज्यों के संगठन के प्रश्न की “निष्पक्ष एवं वस्तुनिष्ठ” जाँच के लिए एक आयोग नियुक्त किया जाएगा, ताकि प्रत्येक घटक इकाई के लोगों के कल्याण के साथ-साथ संपूर्ण राष्ट्र का हित भी सुनिश्चित किया जा सके। इसके पश्चात् भारत सरकार के गृह मंत्रालय के संकल्प संख्या 53/69/53-पब्लिक, दिनांक 29 दिसंबर, 1953 के अंतर्गत इस आयोग की नियुक्ति की गई (परिशिष्ट ‘ए’)। 2. आयोग के समक्ष रखे गए कार्य को इस संकल्प के अनुच्छेद 7 में निम्नलिखित शब्दों में निर्धारित किया गया है— “आयोग इस समस्या की परिस्थितियों, उसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, वर्तमान स्थिति तथा उससे संबंधित सभी महत्वपूर्ण और प्रासंगिक कारकों की जाँच करेगा। वह इस प्रकार के पुनर्गठन से संबंधित किसी भी प्रस्ताव पर विचार करने के लिए स्वतंत्र होगा। सरकार की अपेक्षा है कि आयोग, प्रारंभिक रूप से, विवरणों में न जाकर, उन व्यापक सिद्धांतों के संबंध में सिफारिशें करेगा जिनके आधार पर इस समस्या का समाधान किया जाना चाहिए तथा, यदि वह ऐसा उचित समझे, तो उन व्य...

धर आयोग(17 june 1948)

 धर आयोग(17 june 1948) भाषायी प्रांत आयोग की रिपोर्ट 1948 सेवा में, माननीय राष्ट्रपति, भारत की संविधान सभा, नई दिल्ली। हम, आंध्र, कर्नाटक, केरल और महाराष्ट्र के प्रस्तावित प्रांतों के गठन की उपयुक्तता अथवा अनुपयुक्तता की जाँच करने, उनकी सीमाएँ निर्धारित करने तथा उन प्रांतों और भारत के निकटवर्ती क्षेत्रों में उससे उत्पन्न होने वाले वित्तीय, आर्थिक, प्रशासनिक और अन्य परिणामों का आकलन करने के उद्देश्य से नियुक्त आयुक्तगण, यह रिपोर्ट सादर प्रस्तुत करते हैं। यह उल्लेखनीय है कि हमारी यह रिपोर्ट सर्वसम्मत है और इसमें कोई असहमति टिप्पणी (डिसेंटिंग मिनट) सम्मिलित नहीं है। परिचय 2. दिनांक 17 जून, 1948 की एक अधिसूचना द्वारा हमें आंध्र, केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र प्रांतों के गठन; उससे उत्पन्न होने वाले वित्तीय, आर्थिक, प्रशासनिक तथा अन्य परिणामों; और उनकी अनुमानित सीमाओं के प्रश्न पर प्रतिवेदन देने के लिए नियुक्त किया गया। संविधान की प्रारूप समिति द्वारा की गई वह सिफारिश, जिसके परिणामस्वरूप हमारी नियुक्ति हुई, तथा हमारे कार्यादेश (Terms of Reference) परिशिष्ट–I में पुनः प्रस्तुत किए गए हैं। 2...