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India–Pakistan Relations (भारत-पाकिस्तान संबंध)

🇮🇳 India–Pakistan Relations(भारत-पाकिस्तान सबंध)

भारत और पाकिस्तान के बीच में 3323 किलोमीटर की सीमा है जो 3 राज्य(गुजरात, राजस्थान और पंजाब) और 2 केंद्र शासित प्रदेश(जम्मू कश्मीर और लद्दाख) के साथ लगती है ।

भारत अपनी "पड़ोसी प्रथम नीति" (Neighbourhood First Policy) के अनुरूप पाकिस्तान के साथ सामान्य और मैत्रीपूर्ण पड़ोसी संबंध चाहता है। भारत का निरंतर मत है कि भारत और पाकिस्तान के बीच यदि कोई मुद्दे हैं, तो उन्हें द्विपक्षीय और शांतिपूर्ण तरीके से ऐसे वातावरण में सुलझाया जाना चाहिए जो आतंकवाद और हिंसा से मुक्त हो। ऐसा अनुकूल वातावरण बनाने की जिम्मेदारी पाकिस्तान पर है। यह स्पष्ट कर दिया गया है कि भारत राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा और भारत की सुरक्षा तथा क्षेत्रीय अखंडता को कमजोर करने के सभी प्रयासों से निपटने के लिए दृढ़ और निर्णायक कदम उठाएगा।


भारत–पाकिस्तान के मध्य प्रमुख विवाद के मुद्दे:-

1. कश्मीर मुद्दा (Jammu & Kashmir Issue):-

पाकिस्तान कश्मीर पर न तो भौगोलिक रूप से दावा करता है और न ही सीमा विवाद है बल्कि इस्लामिक विचारधारा का विवाद है। भारतीय उपमहाद्वीप को अगस्त 1947 में आजादी मिली। उस समय यहाँ 565 रियासतें थीं जिनके पास भारत का लगभग 2/5 भाग था। जिसकी कुल जनसंख्या 99 मिलियन थी। इन्हें ही तय करना था कि ये भारत या पाकिस्तान किसकी तरफ जाएँगे। 1947 से पूर्व भारत ऐसा दिखता था।

जम्मू व कश्मीर का शासक जिसका राज्य दोनों देशों के मध्य स्थित था, यह फैसला नहीं कर पाया कि वह किस देश में शामिल होगा। यहाँ के महाराजा हरि सिंह हिंदू थे किंतु उनकी प्रजा अधिकतर मुस्लिम थी। इसलिए उन्होंने पाकिस्तान के साथ यथावत बने रहने का एक समझौता कर लिया जिसमें व्यापार, यातायात और संचार क आवगमन बे रोकटोक चल सके। यह समझौता तात्कालिक (कुछ समय) का था। भारत ने इस प्रकार का कोई समझौता नहीं किया। पाकिस्तान ने इस समझौते का गलत फायदा उठाकर जम्मू व कश्मीर पर आर्थिक व अन्य दबाव बनाने शुरू कर दिए, इसका उद्देश्य जम्मू कश्मीर का पाकिस्तान में विलय कराने का था। जम्मू व कश्मीर जाने वाला एकमात्र रेलमार्ग भी बंद कर दिया गया तथा श्रीनगर-रावलपिंडी मुख्य सड़क पर ट्रैफिक को रोका जाने लगा। जब यह दबाव कार्य नहीं कर पाया तो पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में कबाइलियों द्वारा हमला करा दिया। यहीं से कश्मीर समस्या का जन्म हुआ।



पाकिस्तान ने अपनी सीमा पार से कश्मीर घाटी पर आक्रमण किया। यह आक्रमण पूर्व नियोजित था और दो भागों में किया गया। पहले भाग में धावा बोलने वालों ने पाकिस्तान कश्मीर सीमा पर आक्रमण किया। ये आक्रमणकारी हजारों की संख्या में थे। यह आक्रमण 20 अक्टूबर 1947 को प्रारंभ हुआ। यह आक्रमणकारी अधिकतर पाकिस्तान की उत्तर पश्चिमी फ्रंटियर रियासत के हजारा और पश्तून कबीलों के थे।

कश्मीर में आक्रमणकारी भी दो बार में आए। पहले मुजफ्फराबाद से श्रीनगर की ओर तथा दूसरे नौशेरा-पूंछ क्षेत्र से आए। इन्होंने मार्ग में आने वाले सभी स्थानों पर कब्जा कर श्रीनगर पर आक्रमण किया। 24 अक्टूबर को महाराजा हरिसिंह ने भारत के गर्वनर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन को आवश्यक संदेश पहुँचाया कि आक्रमणकारियों को रोकने के लिए वे भारत की सहायता चाहते हैं।

1947 में भारत–पाक विभाजन के समय काबली आक्रमण के बाद महाराजा हरिसिंह द्वारा जम्मू-कश्मीर का भारत में 26 अक्टूबर 1947 को विधिवत् विलय, जिसे पाकिस्तान स्वीकार नहीं करता। 


पाकिस्तान ने अक्टूबर 1947 में कारगिल, श्रीनगर और पुंछ पर हमला किया। ये सभी स्थान मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र थे।


भारत पाकिस्तान युद्ध (1947-1948)


ऑपरेशन गुलबर्ग : श्रीनगर में युद्ध

एक सिख कमांड के 300 सिपाही लेफ्टिनेट कर्नल दीवान रंजीत राय के नेतृत्व में 27 अक्टूबर को श्रीनगर पहुंचे। कर्नल राय का काम था कि वह श्रीनगर शहर के साथ-साथ हवाई क्षेत्र की भी रक्षा करें। इनकी सेना की टुकड़ियों की बहादुरी व शौर्य के कारण आक्रमणकारी दो दिन तक वहीं रुके रहे। इसी बीच और अधिक सेना श्रीनगर पहुँचा दी गई। कर्नल राय ने श्रीनगर की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसी कारण उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।


शैलातंग का युद्ध


भारतीय वायु सेना के हवाई जहाजों ने बंदूकें, तोपें और गोला बारूद श्रीनगर पहुँचाया। उनका अगला काम कश्मीर घाटी से आक्रमणकारियों को भगाना था। यह काम भारतीय सेना की एक ब्रिगेड द्वारा किया गया। इनका मुख्य हमला शैलातंग नामक स्थान पर हुआ। यह हमला इतना तेज़ था कि शत्रु सेना मात्र 20 मिनट में हार गई। सभी आक्रमणकारी मुजफ्फराबाद की ओर भाग गए। भारतीय वायुसेना के हमलों में आक्रमणकारियों को बहुत नुकसान हुआ। कश्मीर घाटी के बारामूला और उरी पर भारतीय सेना ने आधिपत्य स्थापित कर लिया।


नौशेरा पर हमला


सर्दियों के मौसम में उत्तरी भाग में बर्फबारी होने के कारण सारी गतिविधियाँ जम्मू के दक्षिणी भाग में ही सिमट गई थीं। शत्रु सेना अपने तोपों की तैनाती जम्मू व पुंछ के बीच स्थित नौशेरा में कर रही थी। 5 व 6 फरवरी की रात दुश्मन सेना ने नौशेरा पर तीन तरफ से हमला कर दिया। यह युद्ध भयायनक था जिसमें शत्रु पक्ष काफी हताहत हुआ। हमारे हथियारों का प्रभावशाली प्रयोग ही हमारी जीत और शत्रु के हार का कारण बना।


पुंछ पर हमला


अक्टूबर 1947 में आक्रमणकारियों ने पुंछ पर हमला कर उसकी घेराबंदी कर ली। भारतीय सेना ने लेफ्टिनेंट कर्नल प्रीतम सिंह के नेतृत्व में पुंछ पहुँचकर शहर की रक्षा करने का बीड़ा उठाया। सेना ने रात में पेट्रोलिंग (निरीक्षण) करके आक्रमणकारियों को ढूंढ-ढूँढ़ समाप्त कर दिया। इसके पश्चात् शत्रु पुंछ में दाखिल नहीं हो पाए। दिसंबर 1947 में वायुसेना ने इस क्षेत्र में तोपें और बंदूकें पहुँचाई। यही कार्य श्रीनगर में भी किया गया था। आक्रमणकारियों के हमलों के कारण शरणार्थी और उनके रहने की समस्या पैदा हुई। यही हवाई जहाज सामग्री पहुँचाकर शरणार्थियों को जम्मू व अन्य सुरक्षित क्षेत्रों तक लेकर गए। भारतीय सेना ने आक्रमणकारियों को आगे बढ़ने से रोका।


कारगिल हमला : ऑपरेशन बाइसन (BISON)

पाकिस्तानी आक्रमणकारी कारगिल में भी आए थे। इनको खदेड़ने के लिए 1 नवम्बर 1948 को जोजिला दर्रा से एक ऑपरेशन चालू किया गया था। 22 नवंबर 1947 तक कारगिल सभी आक्रमणकारी से मुक्त हो गया था। यह हमला जनरल थिमैया के नेतृत्व में किया गया। उन्होंने टैंक, तोप और वायु सेना का प्रयोग कर पाकिस्तानियों को हराया। इसी समय कर्नल शेर जंगथापा ने सर्कादू की रक्षा की। उन्होंने एक साल तक चले युद्ध में बिना किसी अतिरिक्त सहायता (गोला बारूद आदि) के शत्रु सेना को परास्त किया। कोई भी मदद न मिलने के कारण उसको पाकिस्तान के आगे समर्पण करना पड़ा। सर्कादू अब पाक अधिकृत कश्मीर का हिस्सा है।

सीजफायर (युद्ध विराम) लॉर्ड माउंटबैटन की सलाह पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू कश्मीर समस्या को संयुक्त राष्ट्र ले गए। जवाहरलाल नेहरू (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 38 के तहत् भारत ने संयुक्त राष्ट्र से संपर्क किया। दिसंबर 1947 में भारत ने संयुक्त राष्ट्र में यह शिकायत की। यूनाइटेड नेशन की सुरक्षा परिषद में 1948 में पहली बार कश्मीर मुद्दे पर चर्चा की गई। जिसमें कश्मीर पर पाकिस्तान का हमला, उनके सैनिक व गैर सैनिक आक्रमणकारियों के हमले की भी चर्चा की गयी। कुछ समय तक पाकिस्तान ने अपना हाथ होने की बात नहीं मानी। उनका कहना था कि ये कबीलाई क्रांति है। किंतु समय के साथ उहोंने अपनी संलिप्तता को स्वीकार किया। 13 अगस्त 1948 को संयुक्त राष्ट्र संघ ने प्रस्ताव पारित कर दोनों देशों से युद्ध विराम करने का अनुरोध किया। साथ ही उन्होंने एक समिति का भी गठन किया जो युद्ध विराम को निरीक्षण करेगी। 1 जनवरी, 1949 को दोनों देश युद्ध विराम के लिए तैयार हो गए। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र द्वारा भारत व पाकिस्तान के लिए एक कमीशन गठित हुआ। (United Nations Commission for India and Pakistan - UNCIP) इसका उद्देश्य युद्ध विराम की निगरानी करना था। एक अन्य कमेटी का भी गठन हुआ जो कि किसी भी पक्ष द्वारा युद्ध विराम के उल्लंघन न करने को सुनिश्चित करेगी। ये समिति थी- (United Nations Military Observer Group for India and Pakistan - UNMOGIP) भारत व पाकिस्तान हेतु संयुक्त राष्ट्र सैन्य निरीक्षण समूह। सयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से शांत रहने का अनुरोध किया। 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का प्रस्ताव39 20 जनवरी 1948 को लागू किया गया था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यूएनसीआईपी की स्थापना करती है तथा उसे निर्देश जारी करती है। काउंसिल ने कश्मीर में स्थित पेट्रोलियम समाधानों में सहायता के लिए एक आयोग ( भारत द्वारा एक सदस्य चुना गया, पाकिस्तान द्वारा एक सदस्य चुना गया और दो स्थायी सदस्य चुने गए एक से सदस्य बनाया गया) की स्थापना की । प्रस्ताव 39 नौ मतों से पारित हुआ, जबकि एक भी मत  विपक्ष में नहीं पड़ा। सोवियत संघ और यूक्रेनी एसएसआर ने मतदान में भाग नहीं लिया। प्रस्ताव 39 को बेल्जियम द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष के रूप में पेश किया गया था और इसका नेतृत्व राष्ट्रमंडल संबंधों के ब्रिटिश मंत्री फिलिप नोएल-बेकर ने किया था।

ब्रिटिश प्रतिनिधिमंडल ने भारत को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के तहत कश्मीर में एक निष्पक्ष प्रशासन स्वीकार करने के लिए राजी करने का प्रयास किया। प्रशासन का नेतृत्व एक तटस्थ अध्यक्ष द्वारा किया जाना था, और कश्मीर पर एक तटस्थ कमांडर-इन-चीफ के नेतृत्व में संयुक्त सैन्य कब्ज़ा होना था, दोनों को संयुक्त राष्ट्र द्वारा नियुक्त किया जाना था। इन प्रयासों को संयुक्त राज्य अमेरिका का समर्थन नहीं मिला। प्रस्ताव 47 के पारित होने तक आयोग के गठन के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। आयोग के गठन और भारतीय उपमहाद्वीप में भेजे जाने में ग्यारह सप्ताह लग गए ।

चेकोस्लोवाकिया का प्रतिनिधित्व करने वाले राजनयिक जोसेफ कोरबेल ने भारत और पाकिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र आयोग के गठन में संयुक्त राष्ट्र की देरी की आलोचना की। उन्होंने तर्क दिया कि जनवरी और अप्रैल 1948 के बीच कश्मीर की राजनीतिक और सैन्य स्थिति में भारी बदलाव आया था।

बाद में पता चला कि आयोग में प्रतिनिधि नामित करने में पाकिस्तान की विफलता के कारण देरी हुई।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 47, , कश्मीर संघर्ष के समाधान से सम्बन्धित है। इसे 21 अप्रैल 1948 को अपनाया गया। भारत और पाकिस्तान दोनों से तर्क सुनने के बाद, परिषद ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 39 से पाँच सदस्यों (अर्जेण्टीना, बेल्जियम, कोलम्बिया, चेकोस्लोवाकिया और संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिनिधियों के साथ) द्वारा स्थापित आयोग का आकार बढ़ा दिया, और आयोग को निर्देश दिया कि वह उपमहाद्वीप में जाए और भारत और पाकिस्तान की सरकारों को इस क्षेत्र में शान्ति-व्यवस्था बहाल करने और कश्मीर के भविष्य का फैसला करने के लिए जनमत तैयार करने में सहायता करें।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद्

तिथि :- 21 April 1948

वैठक सं. कोड :- S/726

विषय :- The India-Pakistan Question

साथ ही साथ इस प्रस्ताव ने विवाद के समाधान के लिए तीन-चरण की प्रक्रिया की सिफारिश की।

  • पहले चरण में, पाकिस्तान को जम्मू और कश्मीर से अपने सभी नागरिकों को वापस लेने के लिए कहा गया था।
  • दूसरे चरण में, भारत को कानून और व्यवस्था के लिए अपनी सेना को न्यूनतम स्तर तक उत्तरोत्तर कम करने के लिए कहा गया था।
  • तीसरे चरण में, भारत को संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित एक जनमत संग्रह प्रशासक नियुक्त करने के लिए कहा गया, जो एक स्वतन्त्र और निष्पक्ष जनमत का संचालन करेगा।

भारत और पाकिस्तान दोनों ने ही इसका विरोध किया, किन्तु संयुक्त राष्ट्र आयोग की मध्यस्थता करने के लिए सराहना भी की। अपनी मध्यस्थता के माध्यम से, आयोग ने अपने स्वयं के दो प्रस्तावों को अपनाते हुए सुरक्षा परिषद प्रस्ताव को संशोधित और संशोधित किया, जिसे भारत और पाकिस्तान दोनों ने स्वीकार किया। इसके बाद, आयोग द्वारा 1949 की शुरुआत में संघर्ष विराम हासिल किया गया था। हालाँकि, विसैन्यीकरण की प्रक्रिया पर असहमति के कारण एक संघर्ष नहीं हुआ। काफी प्रयासों के बाद, आयोग ने दिसम्बर 1949 में अपनी विफलता घोषित की।

संयुक्त राष्ट्र संघ के जनादेश के अनुसार कश्मीर से पाकिस्तान सी हटाएगा और  कश्मीर को पूर्ण रूप दिया जाएगा । उसके बाद जनमत संग्रह करवाया जाएगा।  लेकिन आज तक पाकिस्तान ने कश्मीर से अपनी सुना नहीं हटाई। पाकिस्तानअपने कब्जे वाले कश्मीर को दो भागों में बांट दिया ।ऊपरी भाग को गिलगित - बाल्टिस्तान में और निचले भाग को आजाद कश्मीर में । इसके अलावा सियाचिन के पश्चिम में सक्सगाम घाटी को चीन को उपहार स्वरूप में दे दिया। पाकिस्तान ने 1998 के बाद कश्मीर में ISIS के संचालनमें सीमा पार आतंकवाद फैलाने की रणनीति शुरू की, जिसके चलते 5 से 6 लाख कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार करके कश्मीर घाटी से बाहर कर अपने ही देश में शरणार्थी बनने को मजबूर कर दिया गया । इस तरह से आंतकवाद के जरिए कश्मीर में डेमोग्राफी को बदल गया । शुरुआत में भारत ने लोकतांत्रिक पद्धति से निपटने का प्रयत्न किया मगर वर्तमान सरकार ने 2014 के बाद कश्मीर नीति में गुणात्मक परिवर्तन कर जीरो टॉलरेंस नीति को अपनाया। आंतकवाद से निपटने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक और सैन्य कार्यवाही की गई । 2019 में अनुच्छेद 70 को प्रभावहीन करकेकश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेश में विभाजित कर दिया जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख केंद्र में । इससे पुलिस पर नियंत्रण सीधा गृह मंत्रालय का हो गया और पुलिस व सैना के मध्य सामान्य बेहतर हुआ। आंतकवादियों से निपटने हेतु ऑपरेशन ऑल क्लियर शुरू किया गया । वर्तमान सरकार जम्मू कश्मीर व लद्दाख में इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दे रही है तथा अनेक विकास योजनाओं के माध्यम से जम्मू कश्मीर के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है ।  उदाहरण के लिए 22 से 24 मई 2023 को जी-20  टूरिज्म वर्किंग ग्रुप की बैठक कश्मीर में हुई, जिसके माध्यम से वैश्विक स्तर पर कश्मीर के विकास को दिखाया गया । दुनिया की सबसे ऊंची अटल सुरंग का निर्माण जम्मू कश्मीर में किया गया । 

मुख्य बिंदु:-

  • पाकिस्तान द्वारा 1/3 भाग पर (PoK- गिलगित-बाल्टिस्तान सहित) पर अवैध कब्जा।
  • सीमा पर संघर्षविराम उल्लंघन।
  • कश्मीर को लेकर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का अभियान।


पाकिस्तान जम्मू कश्मीर को केंद्रीय मुद्दा बनाकर इस पर समझौता करने को तैयार नहीं है जबकि भारत के लिए सीमा पर आतंकवाद केंद्रीय मुद्दा है। भारत बातचीत से पहले पाकिस्तान से आतंकवाद बंद करने की मांग कर रहा है।


2. सीमा पार आतंकवाद (Cross-Border Terrorism) :-

भारत  पाकिस्तान "State-Sponsored Terrorism" को बढ़ावा देता है।

उदाहरण: - 

  • 1984 का विमान हाईजैक
  • 2001 में संसद पर हमला
  • समझौता एक्सप्रेस पर हमला 2007
  • 26/11 मुंबई हमला 2008
  • सितंबर 2016 में उरी/पठानकोट हमला - सर्जिकलस्ट्राइक
  • फरवरी 2019 में पुलवामा अटैक - सर्जिकल स्ट्राइक
  • जून 2024 में तीर्थ यात्रियों की बस पर गोलाबारी
  • 22 अप्रैल 2025 में बेसरन घाटी में पर्यटकों पर हमला - ऑपरेशन सिंदूर आंतक पर प्रहार ( 6-7 मई 2025 से 10 मई 2025) । मैं जून 2025 में 7 जो पार्टी डेलिगेशन को विश्व के लगभग 32 देश में भेजा गया । इसके बाद भारत ने आंतकी की हमले को Act of war घोषित करके नया पैमाना स्थापित किया।
  • 10 नवंबर 2025 में लाल किले के सामने विस्फोट

भारत की नीति: आतंकवाद और वार्ता एक साथ नहीं— “Talks and Terror cannot go together.”

UN के प्रस्ताव 1267 के तहत अलकायदा पर प्रतिबंध लगाया गया है परंतु फिर भी अलकायदा से संबंधित पाकिस्तान के अनेक संगठन जैसे - जैश ए मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर ए  तैयबा आदि पाकिस्तान से भारत में आतंकी गतिविधियां करते हैं । यह सभी संगठन इस्लामी धार्मिक आतंकवाद फैलाते हैं।

UN के प्रस्ताव 1373 के अनुसार कोई भी राज्य आंतकवादी संगठनों को वित्तीय, तकनीकी या किसी प्रकार की सहायता नहीं करेगा फिर भी पाकिस्तान इसकी विपरीत व्यवहार करता है।

11 सितंबर 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए अंत की हमले ने आंतकवाद को वैश्विक समस्या मानने पर मजबूर कर दिया।

पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों से फैलने वाला आतंकवाद, भारत–पाकिस्तान द्विपक्षीय संबंधों में एक मुख्य चिंता बना हुआ है। भारत लगातार यह जोर देता रहा है कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ होने वाले सीमा-पार आतंकवाद को समाप्त करने के लिए विश्वसनीय, अपरिवर्तनीय और सत्यापन योग्य कदम उठाए तथा जनवरी 2004 में भारत को उच्चतम स्तर पर दिए गए आश्वासनों—जिन्हें कई बार दोहराया गया है—को पूरा करे, कि उसके नियंत्रण वाले क्षेत्रों का किसी भी रूप में भारत के खिलाफ आतंकवाद के लिए उपयोग नहीं होने दिया जाएगा।

भारत ने बार-बार पाकिस्तान से 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के दोषियों को शीघ्र न्याय के कठघरे में लाने की मांग की है। हालांकि, भारत द्वारा सभी सबूत उपलब्ध कराए जाने के बावजूद पाकिस्तान में मुंबई हमले के मुकदमे में कोई प्रगति नहीं हुई है।

यह भी स्पष्ट किया गया है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा करने के लिए दृढ़ और निर्णायक कदम उठाता रहेगा। 18 सितंबर 2016 को जम्मू-कश्मीर के उरी में सेना शिविर पर सीमा-पार आतंकी हमले और आतंकियों की लगातार घुसपैठ की घटनाओं के बाद, भारतीय सेना ने विश्वसनीय और ठोस खुफिया इनपुट के आधार पर नियंत्रण रेखा के पार स्थित विभिन्न आतंकी लॉन्च-पैड्स पर सर्जिकल स्ट्राइक की, जिसमें आतंकियों और उन्हें समर्थन देने वालों को भारी नुकसान पहुँचाया गया।


14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में भारतीय सुरक्षा बलों के काफिले पर किए गए घृणित और निंदनीय सीमा-पार आतंकी हमले में 40 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए। यह हमला पाकिस्तान-आधारित और पाकिस्तान द्वारा समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्‍मद (JeM) ने किया था, जो संयुक्त राष्ट्र तथा अन्य देशों द्वारा प्रतिबंधित है और जिसका नेतृत्व संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वर्जित आतंकवादी मसूद अज़हर करता है।

विश्वसनीय खुफिया जानकारी प्राप्त हुई थी कि जैश-ए-मोहम्‍मद देश के विभिन्न हिस्सों में एक और आत्मघाती आतंकी हमले की साजिश रच रहा है और इसके लिए आतंकियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस खुफिया-आधारित अभियान के तहत 26 फरवरी 2019 की तड़के, भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में स्थित JeM के एक प्रशिक्षण शिविर पर सफल पूर्व-emptive (अग्रिम) एयर-स्ट्राइक की।


इस आतंक-रोधी कार्रवाई के जवाब में, पाकिस्तान ने 27 फरवरी 2019 को अपनी वायुसेना का उपयोग करते हुए भारतीय क्षेत्र में सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। लेकिन भारत की उच्च स्तरीय तत्परता और सतर्कता के कारण पाकिस्तान के सभी प्रयास नाकाम कर दिए गए।

वर्तमान में पाकिस्तान आतंकवादी का केंद्र बना हुआ है। ऑपरेशन सिंदूर आंतक पर प्रहार के तहत 9 पाकिस्तान आतंकी ठिकानों को नष्ट किया गया ।


3. नदी जल विवाद (Indus Water Dispute) :-

19 सितंबर1960 को सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) भारत–पाक के बीच आयुब खान व जवाहरलाल नेहरू के समय विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई। इसमें सतलुज, रावी और व्यास नदियों का अनन्य अधिकार भारत को दिया गया जिसके पानी का पूर्ण उपयोग भारत कर सकता है । सिंधु, झेलम व चिनाब नदियों पर अधिकार पाकिस्तान को दिया गया मगर इनके पानी का प्रयोग भारत गैर उपभोग के लिए कर सकता है। इस संधि के तहत् 20% पानी का उपयोग व गैर उपभोग का अधिकार भारत को दिया गया जबकि 80% पानी का उपयोग पाकिस्तान करता है। भारत अपने हिस्से के पानी का पूर्ण उपयोग भी नहीं करता फिर भी पाकिस्तान इसके बावजूद भारत पर आरोप लगाता रहता है । बार-बार तकनीकी समितियों में भी विवाद होता रहता है।



पाकिस्तान द्वारा विरोध करने वाली कुछ योजनाएं :-

  • झेलम नदी पर स्थित तुलबुल परियोजना 1980
  • चिनाब नदी पर स्थित बगलिहार परियोजना 2007
  • चिनाब नदी पर स्थित सालाहा व दुलहस्ती परियोजना
  • चिनाब नदी पर स्थित रहले जलविद्युत संयंत्र
  • किशनगंगाजल विद्युत संयंत्र
  • वुलर बैराज

इन विरोध के माध्यम से पाकिस्तान कश्मीर में विकास को बाधित करने का प्रयास करता है।  2015 में पाकिस्तान वर्ल्ड बैंक के पास जाकर सिंधु समझौते केतहत अलग से जज बैठने का अनुरोध किया । 2016 में पाकिस्तान ने रतले व किशनगंगा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट पर बेवजह विरोध किया । इस कारण जनवरी 2023 को भारत ने इसे संशोधित करने का नोटिस पाकिस्तान को दिया। 

स्थायी सिंधु आयोग (Permanent Indus Commission – PIC) की 115वीं बैठक 29–30 अगस्त 2018 को लाहौर में आयोजित हुई। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारतीय सिंधु जल आयुक्त (ICIW) ने किया, जबकि पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व पाकिस्तान सिंधु जल आयुक्त (PCIW) ने किया।

दो दिवसीय बैठक में दोनों पक्षों ने निम्न विषयों पर चर्चा की:-

  • पकल दुल जलविद्युत परियोजना (HEP),
  • लोअर कलनई जलविद्युत परियोजना,
  • तथा सिंधु बेसिन के दोनों ओर निरीक्षण दौरों (reciprocal tours of inspection) की योजना।
  • इसके पश्चात, PCIW के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने 28–31 जनवरी 2019 के दौरान चिनाब बेसिन में पकल दुल, लोअर कलनई, रैटल और अन्य जलविद्युत परियोजनाओं का निरीक्षण किया।

22 अप्रैल 2025 को बेसरन घाटी में अंत की हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौता 1960 को स्थगित कर दिया। भारत ने कहा "खून और पानी दोनों एक साथ नहीं बह सकते।" 


4. सरक्रीक विवाद (Sir Creek Dispute) :-

 गुजरात (कच्छ) और सिंध के बीच 96 किमी लंबा ज्वार-गर्त क्षेत्र।

विवाद: -

भारत: - सरक्रीक की मध्य रेखा (Mid-line) को सीमा मानता है।

पाकिस्तान: - पूर्वी तट (Eastern bank) को सीमा मानता है।

महत्त्व: - समुद्री संसाधन, मछली पालन, तेल व गैस के भंडार, सामरिक महत्व, समुद्री सीमा (EEZ) निर्धारण।

भारत इस समुद्री क्षेत्र मानकर उन समुद्री कानून के अनुसार बराबर भागों में बांटकर समाधान करना चाहता है, पर पाकिस्तान इसे भूमि  का हिस्सा मानकर  1914 के मैप के आधार पर हल चाहता है। 

हारामी नाला इसी क्षेत्र में है जहां से तस्करी व अवैध व्यापार होता है तथा 2008 आतंकी हमले के आतंकियों का प्रवेश द्वार भी यही रहा। इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से यह अति महत्वपूर्ण है ।

यह क्षेत्र कांडला पत्तन गुजरात के निकट है जो पश्चिम एशिया से भारत को जोड़ता है तथा पाकिस्तान द्वारा चीन को लीज पर दिया गया ग्वादर पोर्ट भी इसी के नजदीक है इसलिए यह सामरिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण है ।

अक्टूबर 2025 में पाकिस्तान यहाँ पर अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ा रहा है तथा वहां पर युद्ध अभ्यास भी कर रहा है । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी भाषण में कहा "कराची का एक रास्ता सरकारी से गुजरता है ।"  भारत भी सरक्रीक के पास अपना युद्ध अभ्यास त्रिशूल आयोजित कर रहा है।

भारत द्वारा इस क्षेत्र के पास युद्ध अभ्यास के लिए जारी NOTAM के बाद पाकिस्तान ने भी नॉटम जारी कर दिया, जो यह दर्शाता है कि विवाद चाहता है।


5. सियाचिन विवाद (Siachen Glacier Dispute) :-

लगभग 70 किलोमीटर लंबा यह ग्लेशियर दुनिया का सबसे ऊँचा युद्धक्षेत्र (Karakoram Range)। 1949 व 1972 नियंत्रण रेखा (LoC) मैपिंग में NJ-9842 बिंदु से आगे का क्षेत्र अस्पष्ट छोड़ा गया। पाकिस्तान ने इसे "उत्तर–पूर्व की ओर" मान लिया, पर भारत ने राजीव गांधी के समय अप्रैल 1984 में ऑपरेशन मेघदूत चलाकर सियाचिन के महत्वपूर्ण इलाकों पर नियंत्रण स्थापित किया। इससे चीन में पाकिस्तान दोनों पर नजर रखी जा सकती है। काराकोरम दर्रा यहीं पर है जहां से दुर्बुक दौलत बेग ओल्डी रोड जो लेह को काराकोरम को जोड़ती है ।

आज: Actual Ground Position Line (AGPL) के आधार पर दोनों सेनाएँ तैनात


6. अन्य विवाद (Other Issues) :-

  • व्यापार एवं आर्थिक संबंधों में प्रतिबंध
  • मछुआरों की की गिरफ्तारी का मुद्दा
  • PoK में चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC)—भारत की संप्रभुता का उल्लंघन सीमा पर संघर्ष विराम उल्लंघन


Attempts for Engagement (भारत–पाकिस्तान संवाद के प्रयास) :-


भारत ने पाकिस्तान के साथ सामान्य पड़ोसी संबंध स्थापित करने के लिए कई प्रयास किए हैं। 2014 से यह प्रयास निम्न रूपों में दिखाई देते हैं — 

  • मई 2014 में शपथ ग्रहण समारोह में तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को आमंत्रित करना; 
  • जुलाई 2015 में उफ़ा में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मुलाकात; तथा 
  • दिसंबर 2015 में विदेश मंत्री (EAM) की इस्लामाबाद यात्रा। विदेश मंत्री ने दिसंबर 2015 में व्यापक द्विपक्षीय वार्ता (Comprehensive Bilateral Dialogue) का प्रस्ताव भी रखा था। 

इन पहलों का जवाब भारत के खिलाफ सीमा-पार आतंकवाद और हिंसा की घटनाओं से दिया गया, जैसे —

• 2 जनवरी 2016 को पठानकोट एयरबेस पर सीमा-पार आतंकी हमला,

• अगस्त 2016 में उरी की सेना छावनी पर हमला,

• 14 फरवरी 2019 को पाकिस्तान-आधारित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) द्वारा पुलवामा में भारतीय सुरक्षा बलों के काफिले पर आतंकी हमला।

प्रधानमंत्री ने 30 जुलाई 2018 को श्री इमरान खान से बात की और उनकी पार्टी के नेशनल असेंबली में सबसे बड़ी पार्टी बनने पर उन्हें बधाई दी। प्रधानमंत्री ने 18 अगस्त 2018 को प्रधानमंत्री इमरान खान को एक बधाई-पत्र भी भेजा, जिसमें पूरे क्षेत्र के लोगों के हित में सार्थक और रचनात्मक संवाद की इच्छा व्यक्त की। विदेश मंत्री (EAM) ने 22 अगस्त 2018 को पाकिस्तान के नए विदेश मंत्री को बधाई दी।

प्रधानमंत्री के बधाई-पत्र के जवाब में, पाकिस्तान ने 14 सितंबर 2018 को पत्र लिखकर न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान दोनों विदेश मंत्रियों की बैठक का प्रस्ताव दिया। पाकिस्तान के नए विदेश मंत्री ने 17 सितंबर 2018 को विदेश मंत्री को इसी तरह के प्रस्ताव के साथ पत्र लिखा। इन पत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने की बात, परस्पर शांति की इच्छा और आतंकवाद पर चर्चा की तत्परता दिखाई गई। इन पत्रों में व्यक्त इरादों को देखते हुए, भारत ने 20 सितंबर 2018 को पाकिस्तान के बैठक प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। लेकिन, भारत की स्वीकृति के कुछ ही घंटों के भीतर, पाकिस्तान-आधारित आतंकी संगठनों ने जम्मू-कश्मीर में तीन पुलिसकर्मियों की बर्बर हत्या कर दी। उसी सप्ताह 18 जुलाई 2018 को सीमा पर एक भारतीय BSF जवान की भी क्रूरतापूर्वक हत्या कर दी गई थी। ये सभी घटनाएँ उस समय हुईं जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री ने भारत के नेतृत्व को शांति और बदलाव की इच्छा वाले पत्र भेजे थे।

इसके अलावा, भारत द्वारा पाकिस्तान के समक्ष इन घटनाओं पर कड़ी आपत्ति और सुधारात्मक कदम उठाने की मांग को पाकिस्तान ने पूरी तरह नकार दिया। ऐसी परिस्थितियों में यह आकलन किया गया कि पाकिस्तान के साथ किसी भी वार्ता का कोई अर्थ नहीं होगा। इसलिए भारत को न्यूयॉर्क में दोनों विदेश मंत्रियों की बैठक रद्द करनी पड़ी।

26 मई 2019 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी को चुनाव विजय पर बधाई देने के लिए फोन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें धन्यवाद दिया और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को पहले दिए गए अपने सुझाव — गरीबी से मिलकर लड़ने — को याद दिलाया। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी जोर दिया कि क्षेत्र में शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए आपसी विश्वास तथा हिंसा और आतंकवाद से मुक्त वातावरण अत्यंत आवश्यक है।

पाकिस्तान अब तक एक सामान्य पड़ोसी की तरह व्यवहार नहीं कर पाया है। उसने भारत के खिलाफ सीमा-पार आतंकवाद को जारी रखा है, तथा सामान्य व्यापार, लोगों के बीच संपर्क और दोनों देशों के बीच कनेक्टिविटी को बाधित किया है। 7 अगस्त 2019 को पाकिस्तान ने एकतरफा कदम उठाते हुए राजनयिक संबंधों को निम्न स्तर पर लाने, द्विपक्षीय व्यापार निलंबित करने और भारत के साथ द्विपक्षीय व्यवस्थाओं की समीक्षा करने की घोषणा की। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत और पाकिस्तान के बीच सभी बस और ट्रेन सेवाओं को भी निलंबित कर दिया।

भारत ने पाकिस्तान द्वारा उठाए गए इन एकतरफा कदमों के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों की स्थिति को दुनिया के सामने अत्यधिक गंभीर रूप में प्रस्तुत करने के प्रयासों को अस्वीकार किया है। भारत ने पाकिस्तान से आग्रह किया है कि वह भारत के साथ अपने संबंधों पर किए गए इन एकतरफा कदमों की समीक्षा करे ताकि राजनयिक संचार के सामान्य माध्यम संरक्षित रह सकें।


Trade and Commerce (व्यापार और वाणिज्य) :-

पिछले पाँच वर्षों में भारत–पाकिस्तान द्विपक्षीय व्यापार के आँकड़े निम्नलिखित हैं:

भारत ने 1996 में पाकिस्तान को सर्वाधिक अनुकूल राष्ट्र (MFN) का दर्जा प्रदान किया था। पाकिस्तान की मंत्रिमंडल की 02 नवंबर 2011 की बैठक में भारत को MFN दर्जा देने का निर्णय लिया गया था, लेकिन इसे आज तक लागू नहीं किया गया।

अगस्त 2012 में, भारत ने SAFTA के अंतर्गत गैर-अल्पविकसित देशों (Non-LDCs), जिनमें पाकिस्तान भी शामिल है, के लिए अपनी SAFTA सेंसेटिव लिस्ट में 30% की कमी करने की घोषणा की, जिसके तहत 264 वस्तुओं पर शुल्क तीन वर्षों में घटाकर 5% कर दिया गया।

इसके बावजूद पाकिस्तान ने भारत के प्रति प्रतिबंधात्मक व्यापार नीति जारी रखी।

पुलवामा में सीमा-पार आतंकी हमले के बाद, भारत ने 15 फरवरी 2019 को पाकिस्तान से MFN का दर्जा वापस ले लिया। भारत ने 16 फरवरी 2019 को पाकिस्तान से होने वाले आयात पर 200% कस्टम ड्यूटी भी लगा दी।

इसके बाद पाकिस्तान ने 7 अगस्त 2019 को अपने एकतरफा निर्णयों के तहत, भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार निलंबित कर दिया।

People to People Relations (जन-से-जन संबंध) :-

वर्तमान में पाकिस्तान की हिरासत में 275 भारतीय, जिनमें मछुआरे भी शामिल हैं, होने का अनुमान है। हालांकि, पाकिस्तान ने इनमें से 262 भारतीयों की हिरासत को स्वीकार किया है। लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप, भारत 2014 से अब तक पाकिस्तान की हिरासत से 2133 भारतीयों, जिनमें मछुआरे भी शामिल हैं, की रिहाई और स्वदेश वापसी सुनिश्चित कराने में सफल रहा है।

गुजरात राज्य के मछुआरों के प्रतिनिधियों और अधिकारियों का एक दल मार्च 2015 में कराची गया था ताकि 57 भारतीय मछली पकड़ने वाली नौकाओं की रिहाई सुनिश्चित की जा सके। भारत सरकार पाकिस्तान की हिरासत में मानी जा रही लगभग 1100 भारतीय नौकाओं की रिहाई का मुद्दा निरंतर उठाती रही है।

अक्टूबर 2017 में भारत ने पाकिस्तान को प्रस्ताव दिया कि दोनों देशों में हिरासत में रखे गए मछुआरों और कैदियों से जुड़े मानवीय मुद्दों की समीक्षा करने वाली संयुक्त न्यायिक समिति (Joint Judicial Committee) की प्रक्रिया को फिर से प्रारंभ किया जाए। भारत ने यह भी सुझाव दिया कि मानसिक रूप से अस्वस्थ कैदियों के मुद्दे को भी संबोधित किया जाए। पाकिस्तान ने मार्च 2018 में सिद्धांततः इस प्रस्ताव को सकारात्मक रूप से स्वीकार किया। भारत ने न्यायिक समिति का पुनर्गठन कर लिया है और मानसिक रूप से अस्वस्थ कैदियों की जांच के लिए मेडिकल विशेषज्ञों की टीम भेजने का प्रस्ताव रखा है, लेकिन पाकिस्तान ने बार-बार याद दिलाने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक स्थलों की यात्रा 1974 में दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित धार्मिक स्थलों की यात्रा पर द्विपक्षीय प्रोटोकॉल द्वारा संचालित होती है। यह प्रोटोकॉल पाकिस्तान में 15 धार्मिक स्थलों के लिए हर वर्ष तीन हिंदू और चार सिख तीर्थयात्राओं की अनुमति देता है, जबकि पाकिस्तान से पाँच तीर्थयात्रा समूह भारत में 7 धार्मिक स्थलों का दौरा कर सकते हैं।

Kartarpur Corridor (करतारपुर कॉरिडोर) :-

भारत सरकार ने 22 नवंबर 2018 को पाकिस्तान सरकार को औपचारिक रूप से सूचित किया कि वह भारतीय क्षेत्र में करतारपुर कॉरिडोर का निर्माण शुरू करेगी और पाकिस्तान से आग्रह किया कि वह अंतर्राष्ट्रीय सीमा से पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा करतारपुर साहिब तक आवश्यक सुविधाओं सहित एक कॉरिडोर का निर्माण करे, ताकि भारतीय श्रद्धालुओं को पूरे वर्ष आसान और सुगम पहुंच मिल सके। पाकिस्तान ने उसी दिन, 22 नवंबर 2018, भारत के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया।

भारत और पाकिस्तान के बीच 24 अक्टूबर 2019 को एक समझौता (Agreement) किया गया, ताकि श्रद्धालुओं को गुरुद्वारा दरबार साहिब करतारपुर (पाकिस्तान) जाने में सुविधा मिले और लंबे समय से चली आ रही उनकी मांग को पूरा किया जा सके। इस समझौते के तहत भारतीय श्रद्धालुओं और ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (OCI) कार्डधारकों को पूरे वर्ष, प्रतिदिन, बिना वीज़ा के, भारत से पाकिस्तान स्थित इस पवित्र गुरुद्वारे तक जाने की अनुमति दी गई है।

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 9 नवंबर 2019 को गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के अवसर पर करतारपुर साहिब कॉरिडोर का उद्घाटन किया और पहली जत्थे का ध्वज-प्रस्थान (flag-off) किया। अब तक लगभग 44,000 श्रद्धालु करतारपुर साहिब कॉरिडोर के माध्यम से इस पवित्र गुरुद्वारे की यात्रा कर चुके हैं।




भारत और पाकिस्तान के बीच में संघर्ष:-

पहला इंडो पाक यद्ध या काबली आक्रमण1947-48 ⏩ 26 अक्टूबर 1947 को महाराजा हरिसिंह द्वारा इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ एक्सेस सन 1947 पर हस्ताक्षर ।

द्वितीय इंडो पाक युद्ध या कच्छ पर आक्रमण 12 अप्रैल 1965 वह जम्मू कश्मीर पर हमला 5 अगस्त 1965(पाकिस्तान का ऑपरेशन जिब्राल्टर)⏩ 10 जनवरी 1966 को लाल बहादुर शास्त्री में अयूब खान के मध्य ताशकंद समझौता

1 सितंबर 1965 को पाकिस्तान का ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम

युद्ध विराम (सीजफायर) 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने युद्ध की स्थिति को गंभीरता से लिया। 2 सितंबर 1965 को संयुक्त राष्ट्र महासचिव यू थांट ने दोनों देशों से शांति की अपील की। उन्होंने दोनों देशों से युद्ध रोकने का अनुरोध किया तथा देशों से संयुक्त राष्ट्र सैन्य निरीक्षण दल (United Nations Military Observer Team) के साथ समन्वय करने का भी निवेदन किया। इन्हीं कोशिशों के बीच संयुक्त महासचिव ने भारतीय प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान से मुलाकात की। इसी के परिणामस्वरूप संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 20 सितंबर 1965 को सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर सीजफायर का अनुरोध किया। 27 सितंबर 1965 को दोनों देशों ने सीजफायर की घोषणा कर दी।

न्यूयार्क टाइम्स के पूर्व पत्रकार आरिफ जमाल ने अपनी पुस्तक शैडो वार (Shadow War) में लिखा है- इस युद्ध में भारत की लगभग पूरी जीत हुई थी। भारत ने सीजफायर उस समय स्वीकार किया जब उन्होंने 740 स्कवेयर माइल्स की भूमि पर कब्जा कर लिया था। जबकि पाकिस्तान के पास महज 210 स्कवेयर माइल की जमीन पर कब्जा था।


बांग्लादेश लिबरेशन युद्ध (3 दिसंबर 1971 से 16 दिसंबर1971)⏩90000 पाकिस्तान सुना द्वारा भारत के समक्ष समर्पण करने के बाद जुल्फिकार भूतों में इंदिरा गांधी के मध्य2 जुलाई 1972 को शिमला समझौता हुआ । इसके तहत आपसी विवाद को दीपक से वार्ता सुलझाने पर सहमती व्यक्त कीतथा Loc को 17 सितंबर 1971 को मान्यता प्रदान की गई ।

शकरगढ़ का युद्ध तथा लोंगेवाला हमला इसी युद्ध से संबंधित है। 

भारतीय नौसेना की पश्चिमी, दक्षिणी और पूर्वी नौसेना कमांड को युद्ध जीतने में प्रयोग किया गया। नौसेना युद्ध के दो ऑपरेशन बेहद महत्वपूर्ण थे। ये थे ऑपरेशन ट्राइडेंट (Trident) और आपरेशन पायथन (Python)। ये दोनों आपरेशन पश्चिमी मोर्च पर पाकिस्तान की कराची बंदरगाह को निशाना बनाने के लिए किए गए थे।

भारतीय सेना ने पाकिस्तानी फौज को पछाड़कर 16 दिसंबर को ढाका की घेराबंदी कर ली। जनरल ए.ए.के.नियाजी को आत्मसमर्पण करने की अंतिम चेतावनी दी गई। उन्होंने बिना शर्त समर्पण कर दिया। यह समर्पण उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल जे.एस. अरोड़ा के सम्मुख किया। इसी दिन पाकिस्तान ने एक तरफा सीजफायर की घोषणा कर दी और अपनी पूरी सेना का भारत के आगे समर्पण कर दिया। 93000 सैनिकों को युद्ध बंदी बनाकर युद्ध का अंत हो गया। इस प्रकार पूर्वी पाकिस्तान आजाद हो गया और 'बांग्लादेश' नाम से एक नए देश का उदय हुआ।


LOC विवाद 1972

सियाचिन विवाद 1984

कारगिल युद्ध (पाकिस्तान का ऑपरेशन बद्र)1999 ⏩ भारतीय सेवा का ऑपरेशन विजय और भारतीय वायु सेवा का ऑपरेशन सफेद सागर⏩ अटल बिहारी वाजपेई नवाज शरीफ के मध्य 21 फरवरी 1999 को लाहौर घोषणा पत्र⏩ बस कूटनीति का प्रारंभ अर्थात् लाहौर बस सेवा का शुभारंभ


कारगिल युद्ध में अमेरिकी हस्तक्षेप

युद्ध प्रारंभ होने की स्थिति में पाकिस्तान ने अमेरिका से शांति व सुलह कराने के लिए मदद मांगी। 18 जून को जी-8 (G-8) समूह के देशों के सम्मेलन में विश्व के बढ़ते औद्योगिक राष्ट्रों ने पाकिस्तान से नियंत्रण रेखा पर आक्रमण न कर भारत से बातचीत की पहल करने की अपील की। यह सम्मेलन जर्मनी के कोलोंग में हुआ था। अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने हस्तक्षेप करने से मना कर दिया। उनका कहना था कि जब तक पाकिस्तानी सेना पूरी तरह से भारत की नियंत्रण रेखा से पीछे नहीं हो जाती, वे शांति की अपील नहीं करेंगे। 4 जुलाई को पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने अपनी सेना नियंत्रण रेखा से पीछे कर ली। इस प्रकार यह संघर्ष कुछ कम हुआ। हालांकि कुछ फौजें अभी भी नियंत्रण रेखा पर डटी हुई थी। संयुक्त जिहाद परिषद (United Jihad Council) ने पाकिस्तान के इस फैसले की निंदा करते हुए, आजादी की लड़ाई स्वयं अकेले लड़ने का निर्णय लिया। प्रतिवर्ष कारगिल विजय दिवस 26 जुलाई को मनाया जाता है। भारत ने 1972 के शिमला समझौते के तहत निश्चित अपने सारे क्षेत्र वापिस ले लिए। विश्व समुदाय ने पाकिस्तान द्वारा अपनी पैरा मिलिट्री फोर्स तथा विद्रोहियों द्वारा लाइन ऑफ कंट्रोल को पार करके युद्ध भड़काने की आलोचना की। पाकिस्तान ने विश्व समुदाय को इसका औचित्य बताने का प्रयास किया परंतु वैश्विक स्तर पर इसके राजनयिक रवैये को बहुत ही कम साथ मिला।

लाहौर घोषणा पत्र :-

1. परस्पर शांति एवं स्थायित्व को बढावा दिया जायेगा तथा लोगों के विकास एवं समृद्धि के लिए कार्य किया जायेगा।

2. स्थाई शांति एवं सुखद सम्बन्ध दोनों देशों की जनता के भविष्य के लिए आवश्यक हैं।

3. सुरक्षा के क्षेत्र में परमाणु हथियारों के दृष्टिकोण ने दोनों देशों के उत्तरदायित्व को बढ़ा दिया।

4. शिमला समझौते में दोनों देशों ने वचनबद्धता व्यक्त की।

5. सयुक्त राष्ट्र के चार्टर में आस्था तथा शांतिपूर्ण सहस्तित्व को मान्यता दी गयी।

लाहौर घोषणा पत्र के मूल सिद्धान्तों के अतिरिक्त विदेश सचिवों के मध्य भी सहमति के ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए जो निम्नलिखित हैं-

1. दोनों देश सुरक्षा के सन्दर्भ में परमाणु संघर्ष रोकने हेतु आपसी विश्वसनीयता बढ़ाने हेतु क़दमों की पहल करेंगे।

2. दोनों देश आपस में परमाणु हथियारों के अचानक एवं अनधिकृत उपयोग की संभावनाओं को रोकने हेतु एक-दूसरे को प्रक्षेपास्त्रों की परीक्षण की सूचना उपलब्ध कराएँगे।

3. दोनों देश अपने अपने यहाँ अलग से परमाणु परीक्षण पर प्रतिबंध रखने का प्रयत्न करेंगे।


कारगिल पुर्ननिरीक्षण समिति (Kargil Review Committee)


युद्ध समाप्त होने पर भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने घुसपैठियों की खबर न लग पाने के कारणों की जांच के आदेश दिए। इस समिति का उद्देश्य सेना की चूक और सुधारों की आवश्यकता, का पता लगाना था। इस कमेटी में के. सुब्रहणयम (अध्यक्ष), लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) के. के. हजारी, वी.जी. वर्गीस और सतीश चंद्र (सचिव, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय - NSCS - National Security Council Secretariat) समिति के सदस्य सचिव थे। समिति की जांच व निष्कर्ष मुख्यतः सरकारी प्रपत्रों, प्रमाणिक रिकार्ड और दस्तावेजों की फोटोकॉपियों पर आधारित है। यह जाँच रिपोर्ट इस बात पर निर्भर नहीं है कि कारगिल में क्या हुआ अपितु ऐसे कौन से कदम उठाए जाएँ जिससे भविष्य में कारगिल संघर्ष जैसी स्थिति दुबारा उत्पन्न न हो। इस रिपोर्ट में हमारे सुरक्षा तंत्र को मजबूत और पुनः संरचना का सुझाव दिया गया।


अन्य महत्वपूर्ण समझौते:-

कराची समझौत 27 जुलाई 1949 :- 1949 के कराची समझौते पर भारत और पाकिस्तान के सैन्य प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए थे, जिसकी निगरानी भारत और पाकिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र आयोग ने की थी, जिसने 1947 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद कश्मीर में युद्ध विराम रेखा स्थापित की थी। इसने एक युद्ध विराम रेखा स्थापित की जिसकी निगरानी तब से संयुक्त राष्ट्र के पर्यवेक्षकों द्वारा की जा रही है। 830 किलोमीटर लोक का निर्धारण ।


नेहरू लियाकत समझौता या अल्पसंख्यकों पर दिल्ली समझौत 8 अप्रैल 1950 

शरणार्थियों को अपनी संपत्ति का निपटान करने के लिए वापस जाने की अनुमति दी गई । जबरन धर्मांतरण को मानता नहीं दी गई थी और अल्पसंख्यक अधिकारों की पुष्टि की गई । लूटी की संपत्ति को वापस किया जाना भी इसमें सम्मिलित था ।


नॉन न्यूक्लियर समझौता 21 दिसंबर 1988 :- राजीव गांधी और बेनजीर भुट्टो के मध्य

समझौते के तहत, दोनों देशों को प्रत्येक कैलेंडर वर्ष की 1 जनवरी को एक-दूसरे को समझौते के अंतर्गत आने वाले परमाणु प्रतिष्ठानों और सुविधाओं की जानकारी देनी होगी। ऐसा पहला आदान-प्रदान 1 जनवरी 1992 को हुआ था।


जम्मू कश्मीर सांसद प्रस्ताव 22 फरवरी 1994:- 

"यह सदन पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित शिविरों में आतंकवादियों को प्रशिक्षण देने, हथियारों और धन की आपूर्ति करने, जम्मू-कश्मीर में विदेशी भाड़े के सैनिकों सहित प्रशिक्षित आतंकवादियों की घुसपैठ में सहायता करने में पाकिस्तान की भूमिका पर गहरी चिंता व्यक्त करता है, जिसका घोषित उद्देश्य अव्यवस्था, असामंजस्य और तोड़फोड़ पैदा करना है:

दोहराया कि पाकिस्तान में प्रशिक्षित आतंकवादी लोगों के खिलाफ हत्या, लूट और अन्य जघन्य अपराधों में लिप्त हैं, उन्हें बंधक बना रहे हैं और आतंक का माहौल बना रहे हैं;

भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर में विध्वंसक और आतंकवादी गतिविधियों को पाकिस्तान द्वारा दिए जा रहे निरंतर समर्थन और प्रोत्साहन की कड़ी निंदा करता है;

पाकिस्तान से आतंकवाद को अपना समर्थन तत्काल बंद करने का आह्वान करता है, जो शिमला समझौते और अंतर-राज्यीय आचरण के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मानदंडों का उल्लंघन है और दोनों देशों के बीच तनाव का मूल कारण है। यह दोहराता है कि भारतीय राजनीतिक और लोकतांत्रिक संरचनाएं और संविधान अपने सभी नागरिकों के मानवाधिकारों के संवर्धन और संरक्षण के लिए दृढ़ गारंटी प्रदान करते हैं;

पाकिस्तान के भारत विरोधी झूठ और निंदा अभियान को अस्वीकार्य और निंदनीय मानते हैं।

पाकिस्तान से आने वाले अत्यधिक भड़काऊ बयानों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई तथा पाकिस्तान से आग्रह किया गया कि वह ऐसे बयान देने से बचे जो माहौल को खराब करते हों तथा जनमत को भड़काते हों;

भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर के उन क्षेत्रों में दयनीय स्थिति और मानवाधिकारों के उल्लंघन तथा लोगों की लोकतांत्रिक स्वतंत्रता से वंचित होने पर खेद और चिंता व्यक्त करता है, जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में हैं;

भारत की जनता की ओर से,

दृढ़तापूर्वक घोषित करता हूं कि-

(क) जम्मू और कश्मीर राज्य भारत का अभिन्न अंग रहा है, है और रहेगा तथा इसे देश के शेष भाग से अलग करने के किसी भी प्रयास का सभी आवश्यक तरीकों से विरोध किया जाएगा;

(ख) भारत में अपनी एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के विरुद्ध सभी षड्यंत्रों का दृढ़तापूर्वक मुकाबला करने की इच्छाशक्ति और क्षमता है;

और मांग करता है कि -

(ग) पाकिस्तान को भारतीय राज्य जम्मू और कश्मीर के उन क्षेत्रों को खाली करना होगा, जिन पर उसने आक्रमण के माध्यम से कब्जा कर लिया है; और यह संकल्प लेना होगा कि -

(घ) भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के सभी प्रयासों का दृढ़ता से सामना किया जाएगा।

प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ। अध्यक्ष महोदय: प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ।


आगरा शिखर वार्ता 16 जुलाई 2001 :- परवेज मुशर्रफ में अटल बिहारी वाजपेई के बीच में

प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के निमंत्रण पर पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ 14-16 जुलाई, 2001 को भारत आए। इस बैठक में परमाणु हथियारों में भारी कटौती का प्रस्ताव रखा गया और कश्मीर विवाद तथा सीमा पार आतंकवाद से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई। वार्ता विफल हो गई और आगरा संधि पर हस्ताक्षर नहीं हो सके।

हवाना संयुक्त घोषणा पत्र 16 सितंबर 2006 को:- परवेज मुशर्रफ में मनमोहन सिंह के बीच में

मुंबई बम विस्फोर्ट के पश्चात् भारत व पाकिस्तान के मध्य विदेश सचिव स्तर की वार्ता को स्थगित कर दिया गया था, लेकिन नवम्बर से इसे पुनः आरम्भ करने का निर्णय लिया गया। इस संयुक्त घोषणा पत्र में निम्न बिन्दुओं को शामिल किया गया है :-

1. दोनों देशों के मध्य शांति बनाये रखने एवं शांति को सफल बनाने के लिए पूर्ण रूप में सहयोग करेंगे, यह सहयोग न केवल दोनों देशों के लिए वरन दक्षिण एशिया के लिए भी आवश्यक है।

2. सभी प्रकार के आतंकवाद की निंदा की गयी और उससे मुकाबले का भी निर्णय लिया गया।

3. दोनों देशों के मध्य सभी मुद्दों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने का निर्णय लिया गया।

4. समग्र वार्ता को बनाए रखने के लिए विदेश सचिव स्तर की वार्ता प्रारंभ की जाएगी।

5. सियाचिन मुद्दे को सुलझाया जाएगा।

6. सरक्रीक मुद्दे का संयुक्त रूप में सर्वेक्षण किया जायेगा।

7. विश्वास बनाने के उपायों को लागू किया जायेगा।


इस्लामाबाद शिखर सम्मेलन 2004

अटल बिहारी वाजपेई परवेज मुशर्रफ 4-6 जनवरी 2004 को इस्लामाबाद, पाकिस्तान में दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) की बारहवीं शिखर बैठक में मिले थे । 


इस्लामाबाद शिखर सम्मेलन 2014

एससीओ इस्लामाबाद शिखर सम्मेलन 2024, शंघाई सहयोग संगठन के शासनाध्यक्षों (सीएचजी) की 25वीं वार्षिक परिषद थी, जो 15 से 16 अक्टूबर 2024 के बीच इस्लामाबाद, पाकिस्तान में आयोजित की गई थी।


सहयोग के प्रयास :-

ट्रेक 1 नीति 

इसके अंतर्गत वार्ता सरकारी अधिकारिक , मंत्री आदि का प्रतिनिधि के रूप में प्रोटोकोल के अंतर्गत आधिकारिक वार्ता होती है।


ट्रेक 2 नीति

इसके अंतर्गत अवकाश प्राप्त विदेश सेवा, सैनिक, सुरक्षा अधिकारी या गैर सरकारी व्यक्तियों के माध्यम से अनौपचारिक वार्ता की जाती है विश्वास बहाली हेतु । यह नीति 1990 के बाद शुरू की गई थी और इसके अंतर्गत पहली वार्ता इसके अंतर्गत 1991 - 92 में नीमराणा वार्ता की गई थी।  

ओटावा वार्ता जुलाई 2011


परमाणु CBM

भारत पाकिस्तान के मध्य 1999 के लाहौर घोषणा-पत्र को परमाणु सी. बी. एम. का आधार माना जा सकता है। लाहौर घोषणा पत्र के बाद कारगिल युद्ध और भारत संसद पर हमले को लेकर दोनों देशों के संबंध निम्नतम बिंदु पर आ गए लेकिन संप्रति परमाणु क्षेत्र में सी. बी. एम. पर प्रगति देखी जा सकती है। अप्रैल 2006 में परमाणु CBM को लेकर चौथी दौर की वार्ता हुई।

परमाणु सी. बी. एम. के सन्दर्भ में मुख्य मुद्दे निम्नलिखित है :-

1. विदेश सचिवों के मध्य सुरक्षा एवं परमाणु सिद्धांत के संबंध में परस्पर विचार-विमर्श करना।

2. दोनों देशों के मध्य सुरक्षा एवं शांति के स्थाई वातावरण का निर्माण करना।

3. प्रक्षेपास्त्रों के परीक्षण के सन्दर्भ में पूर्व सुचना एवं पूर्व अधिसूचना जारी करने के सम्बन्ध में समझौता ।

4. दोनों देशों के विदेश सचिवों के मध्य हॉटलाइन को प्रकार्यात्मक बनाना ।

5. परमाणु मुद्दे के सन्दर्भ में परमाणु खतरे को कम करने के उपाय करने तथा परमाणु क्षेत्र में दुर्घटनाओं को रोकने का उपाय।

6. परमाणु क्षेत्र में इस सी. बी. एम. का अत्यधिक महत्व है, क्योंकि दोनों देशों को परमाणु संघर्ष क्षेत्र माना जाता है।


समग्र वार्ता 

2004,2006,2014 (असफल)


पाकिस्तान में सैन्य शासन 

1958-71

1977-88

1999-2008


चश्मा 5 मियांवाली (पंजाब-पाकिस्तान) में चीन $4.8b की लागत से द्वारा 120 मेगावाट का न्यूक्लियर पावर प्लांट बन रहा है ।


कॉलिन लूथर पॉवेल संयुक्त राज्य अमेरिका के 65वें विदेश मंत्री थे। वह देश के पहले अश्वेत विदेश मंत्री थे। विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल की सीनेट की विदेश संबंध समिति के समक्ष अपनी पुष्टि सुनवाई में टिप्पणी कि भारत "एक ऐसा देश है जिसे हमारी विदेश नीति के लेंस में अधिक से अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहिए।"

इस प्रकार, कॉलिन पॉवेल ने कहा कि 'हमें दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के साथ समझदारी से पेश आना चाहिए... हमें पाकिस्तान में अपने दोस्तों की उपेक्षा न करते हुए, भारत की सहायता के लिए और लगातार अधिक काम करने की आवश्यकता है।"

फरीद् जकारिया ने अपने वर्क दू पोस्ट्र-अमेरिकन वर्ल्ड में जॉर्ज डब्ल्यू. बुश को "अमेरिकी इतिहास में सबसे भारतीय समर्थक राष्ट्रपति होने के रूप में वर्णित किया।"


Importants Books:-









परमाणु परीक्षण 

भारत द्वारा :-

भारत ने राजस्थान के पोखरण में दो परमाणु परीक्षण किए हैं: पहला, पोखरण-I (ऑपरेशन स्माइलिंग बुद्धा), 18 मई, 1974 को हुआ था, जिससे भारत परमाणु क्षमता संपन्न देशों की श्रेणी में शामिल हो गया। दूसरा, पोखरण-II (ऑपरेशन शक्ति), मई 1998 में किया गया था, जिसमें पाँच परमाणु उपकरणों का परीक्षण किया गया था।  इस दौरान कुल पाँच परमाणु उपकरणों का परीक्षण किया गया था।

पाकिस्तान द्वारा :-

पाकिस्तान का चगाई-I परमाणु परीक्षण श्रृंखला 28 मई 1998 में किया गया एक एकल परमाणु परीक्षण था।


भारत,पाकिस्तान और चीन एनपीटी के हस्ताक्षर करता नहीं हैं ।

भारत 27 जून 2016 को MTR का पूर्ण सदस्य बन गया लेकिन पाकिस्तान इसका सदस्य नहीं है ।




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