यू. जी. सी. नेट (दिसम्बर) परीक्षा, 2013[राजनीति विज्ञान_द्वितीय प्रश्न-पत्र का हल]
Q (1). निम्नलिखित में से कौनसा प्लेटो की रिपब्लिक का प्रधान पात्र नहीं है?
(a) पोलिमार्कस
(b) एडीमेन्टस
(c) प्रोटागोरस
(d) ग्लोकोन
उत्तर-(c)
व्याख्या:- रिपब्लिक प्लेटो की सर्वश्रेष्ठ कृति है। जिसमें उसने दार्शनिक शासक व न्याययुक्त आदर्श राज्य की कल्पना की है। जो संवाद शैली में लिखी गयी है। सुकरात, ग्लौकॉन, पोलेमार्चस, एडेइमेंटस, सेफेलस, सोफोक्लीज़, थेमिस्टोकल्स, साइमोनाइड्स, थ्रेसिमाचस, क्लीटोफ़ोन आदि इसके प्रधान पात्र है।
प्रोटागोरस प्लेटो के रिपब्लिक के पात्र नहीं हैं।
प्रोटागोरस (Protagoras) एक यूनानी (Greek) दार्शनिक थे। ये सोफिस्ट आंदोलन (Sophist Movement) के सबसे प्रसिद्ध विचारक थे।प्लेटो ने “Protagoras” नामक एक संवाद (Dialogue) लिखा है।
इसमें सुकरात और प्रोटागोरस के बीच “क्या सदाचार (Virtue) सिखाया जा सकता है?” इस विषय पर चर्चा होती है। प्लेटो इस संवाद में प्रोटागोरस के सापेक्षवाद की आलोचना करते हैं और सत्य के स्थायी (objective) स्वरूप का समर्थन करते हैं।
Q (2). सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए कोडों से सही उत्तर का चयन करें :-
सूची-1 (लेखक) सूची-II (पुस्तकें)
a. ए. आरब्लास्टर i. पार्टिसिपेशन एण्ड डेमोक्रेटिक थ्योरी
b. सी.बी. मैकफर्सन ii. मॉडल्स ऑफ डेमोक्रेसी
c. सी. पेटमैन iii. दी रियल वर्ल्ड ऑफ डेमोक्रेसी
d. डी.हेल्ड iv. डेमोक्रेसी
कोड :-
a b C d
(a) ii i iii iv
(b) iv iii i ii
(c) ii i iv iii
(d) iii iv ii i
उत्तर-(b)
व्याख्या-
सी. पेटमैन (C. Pateman) – “Participation and Democratic Theory”
कैरोल पेटमैन एक प्रसिद्ध नारीवादी राजनीतिक सिद्धांतकार हैं। उनकी पुस्तक “Participation and Democratic Theory” (1970) में उन्होंने भागीदारीपूर्ण लोकतंत्र की अवधारणा को मजबूत किया। वे कहती हैं कि लोकतंत्र तभी सच्चा होगा जब नागरिक निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में सक्रिय भाग लें। उन्होंने रूसो और मिल के विचारों को आधुनिक संदर्भ में पुनःव्याख्यायित किया।
Q(3). मार्क्स के लेखों का आरोही क्रम में सही अनुक्रम बताइये :-
i. काँट्रिब्यूशन टू दी क्रिटीक ऑफ पोलिटिकल इकोनोमी
ii. पॉवर्टी ऑफ फिलोसोफी
iii. थीसिस ऑन फियोरबाक
iv. कम्यूनिस्ट मैनीफेस्टो
नीचे दिए कोडों से सही उत्तर का चयन करें :-
(a) i, ii, iii, iv
(b) ii, iii, iv, i
(c) iii, ii, iv, i
(d) iv, i, ii, iii
उत्तर-(c)
व्याख्या-
1️⃣ Theses on Feuerbach – 1845
➡️ यह मार्क्स की शुरुआती दार्शनिक रचना है।
➡️ इसमें उन्होंने लुडविग फ्यूरबाख के भौतिकवाद की आलोचना की और कहा कि
फ्यूरबाख ने केवल भौतिक जगत की व्याख्या की है,लेकिन वास्तविक कार्य यह है कि दुनिया को बदलना चाहिए।
➡️ यह मार्क्स के व्यवहारिक भौतिकवाद (Practical Materialism) की नींव रखती है।
2️⃣ The Poverty of Philosophy – 1847
➡️ यह मार्क्स की पिएर जोसेफ प्रूधों (Proudhon) की पुस्तक Philosophy of Poverty की आलोचना है।
➡️ इसमें उन्होंने बताया कि सामाजिक परिवर्तन केवल विचारों से नहीं, बल्कि भौतिक परिस्थितियों और वर्ग संघर्ष (Class Struggle) से होता है।
3️⃣ The Communist Manifesto – 1848
➡️ इसे कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स ने मिलकर लिखा था।
➡️ इसमें उन्होंने ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism) का सिद्धांत दिया और बताया कि इतिहास का हर युग वर्ग संघर्षों पर आधारित है। अंततः सर्वहारा (श्रमिक वर्ग) पूँजीवादी व्यवस्था को समाप्त करेगा।
➡️ प्रसिद्ध वाक्य: “Workers of the world, unite!” (सारे विश्व के मजदूरों एक हो जाओ!)
4️⃣ A Contribution to the Critique of Political Economy – 1859
➡️ यह मार्क्स का आर्थिक ग्रंथ है जिसमें उन्होंने समाज की आर्थिक संरचना (Economic Structure) और आधार (Base) तथा अधिरचना (Superstructure) का सिद्धांत स्पष्ट किया।
➡️ यह पुस्तक बाद में उनके महान ग्रंथ “Das Kapital” (1867) की आधारशिला बनी।
4. "प्रत्येक व्यक्ति के पास न्याय पर संस्थापित अनुल्लंघनीयता होती है जो सम्पूर्ण समाज का कल्याण भी दबा नहीं सकता है।" यह किसने कहा है?
(a) जॉन रॉल्स
(b) रॉबर्ट नॉज़िक
(c) फ्रेडरिक हेयक
(d) हैबरमास
उत्तर-(a)
व्याख्या-
यह विचार जॉन रॉल्स की प्रसिद्ध पुस्तक “A Theory of Justice” (1971) से लिया गया है।
➡️ रॉल्स के अनुसार –
“प्रत्येक व्यक्ति के पास न्याय (Justice) पर आधारित ऐसी अनुल्लंघनीयता (Inviolability) होती है जिसे समाज के सामूहिक हित (Collective Welfare) के नाम पर भी तोड़ा नहीं जा सकता।”
⚖️ मुख्य अर्थ:-
1. व्यक्ति के अधिकार सर्वोपरि हैं —
किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रताओं का उल्लंघन संपूर्ण समाज के हित के लिए भी नहीं किया जा सकता।
2. न्याय सामाजिक कल्याण से पहले है —
रॉल्स कहते हैं कि न्याय (Justice), समाज के अधिकतम सुख (Utility) से भी अधिक प्राथमिक है। यह विचार उपयोगितावाद (Utilitarianism) की आलोचना करता है, क्योंकि उपयोगितावाद “सामूहिक सुख के लिए व्यक्तिगत अधिकारों का बलिदान” उचित मानता है।
3. व्यक्ति की गरिमा (Dignity) और स्वतंत्रता (Freedom) को रॉल्स ने समाज की मूल नींव माना है।
विचारधारा: उदारवादी न्याय का सिद्धांत (Liberal Theory of Justice)
5. उपयोगितावाद का संस्थापक कौन था?
(a) बैन्थम
(b) जेम्स मिल
(c) डेविड ह्यूम
(d) प्रीस्टले
उत्तर-(a)
व्याख्या- 'अधिकतम संख्या के अधिकतम हित', सम्बन्धी प्राचीन सिद्वान्त को शास्त्रीय एवं व्यवस्थित रुप देने का तथा राजनीति के क्षेत्र में इसे लागू कर लोकप्रिय एवं प्रभावशाली विचारधारा बनाने का श्रेय बैन्थम को है, अतः इसी कारण से कई विद्वान 'उपयोगितावाद' को 'बैन्थमवाद' के नाम से भी पुकारते हैं।
6. निम्नलिखित में से कौन सा लेख माओ द्वारा नहीं लिखा गया है?
12. निम्नलिखित लेखकों में से किसने अभिजात वर्ग को दो मोटे प्रकारों में वर्गीकृत किया है?
(i) संगठित और निदेशित करने वाले अभिजात वर्ग
(ii) अनौपचारिक रूप से संगठित तथा विसरित अभिजात वर्ग
(a) विलफ्रेडो पैरेटो
(b) रॉबर्ट मिचेल
(c) गायटेनो मोस्का
(d) कार्ल मानहीम
उत्तर-(d)
व्याख्या-कार्ल मानहीम ने अभिजात वर्ग को निम्न प्रकारों में विभाजित किया है- प्रथम वर्ग के अन्तर्गत दार्शनिक, वैज्ञानिक, लेखक, कलाकार आते हैं तथा दूसरे वर्ग में मध्यमस्तरीय अभिजन आते हैं, जो पत्रकारिता, अध्यापन, प्रकाशन, आदि कार्यों में संलग्न हैं।
साहित्य भवन पब्लिकेशन्स, तुलनात्मक राजनीति
13. कौटिल्य के अनुसार, राजा के लिए उत्तम अभिशासन के सिद्धान्त कौन से हैं?
1. वैयक्तिकता का कर्तव्यों के साथ विलय।
2. आचार संहिता के साथ अनुशासित जीवन व्यतीत करना।
3. कानून एवं व्यवस्था बनाए रखना।
4. बुरे मंत्रियों को लेखकों के साथ प्रतिस्थापित करना।
नीचे दिए कोडों से सही उत्तर का चयन करें :
कोड :
(a) 1, 2 और 4
(c) 2, 3 और 4
(b) 1, 2, और 3
उत्तर-(b)
(d) 1, 2, 3 और 4
व्याख्या-कौटिल्य ने राजा के आवश्यक गुणों पर बल दिया है। वह अपने राजा को केवल सत्ता उपयोग करने वाले व्यक्ति के रुप में नहीं देखता वह उसे राजर्षि बनाना चाहता है। उसके अनुसार राजा को कुलीन, धर्म की मर्यादा चाहने वाला, कृतज्ञ, दृढ़निश्चय, विचारशील, सत्यवादी, विवेकपूर्ण, वृद्धों के प्रति आदरशील, दूरदर्शी, उत्साही, युद्ध में चतुर होना चाहिए। कौटिल्य के राजनीतिक विचार उसकी पुस्तक अर्थशास्त्र में मिलता है। जिसमें 15 अधिकरण व 150 अध्याय हैं।
डॉ. बी.एल. फड़िया, राजनीति विज्ञान
14. नीचे दो कथन दिये गये हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) का नाम दिया गया है :
अभिकथन (A) : व्यवहारवादियों के लिए, अस्पष्ट होने के बजाय गलत होना बेहतर था।
कारण
(R) : बजाय गैर-प्रासंगिक रूप से यथार्थ होने के, अस्पष्ट होना बेहतर था।
कोड :
(a) (a) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) असत्य है, परन्तु (R) सत्य है।
(d) (A) सत्य है, परन्तु (R) असत्य है।
उत्तर-(*)
व्याख्या- व्यवहारवादी एक व्यवस्थित अध्ययन के समर्थक है अनुसंधान तथा सिद्धांत में घनिष्ठ सम्बन्ध है।
नोट- यूजीसी आयोग ने इसका उत्तर विकल्प (d) माना है।
15. ए.एफ.के. ऑर्गेन्स्की द्वारा प्रतिपादित राजनीतिक विकास की निम्नलिखित अवस्थाओं को आरोही क्रम में व्यवस्थित करें। नीचे दिए कोडों से सही उत्तर का चयन करें :
i. आदिम राष्ट्रीय एकीकरण
ii. प्रचुरता
iii. औद्योगिकीकरण
iv. राष्ट्रीय कल्याण
कोड :
(a) i, ii, iii, iv
(b) i, iii, ii, iv
(c) i, iii, iv, ii
(d) iv, ii, iii, i
उत्तर-(c)
व्याख्या-ए.एफ.के. ऑर्गेन्सकी द्वारा प्रतिपादित राजनीतिक विकास की अवस्थाओं का आरोही क्रम निम्न प्रकार से है-
(1) आदिम एकीकरण की राजनीति
(2) औद्योगीकरण की राजनीति
(3) राष्ट्रीय लोककल्याण की राजनीति
(4) समृद्धि की राजनीति
16
बी. एल. फड़िया, राजनीति विज्ञान
. सूची-1 को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए कोडों से सही उत्तर का चयन करें :
सूची-1 (सरकार का प्रकार)
सूची-II (मुख्य गुण)
a. सैनिक शासन प्रणाली ⅰ.
आदर पर आधारित
b. वंशगत शासन
ii. जबरदस्ती पर आधारित
c. नकली लोकतंत्र
iii. उदार लोकतंत्र के जैसे सावधिक चुनाव, परन्तु सत्ता अल्पतन्त्र के हाथों में रहती है।
d. उदार लोकतंत्र
iv. सरकार की प्रक्रिया में विस्तृत स्वैच्छिक सहभागिता
कोड :
a
b
C
d
(a) i
ii
iii
iv
(b) ii
i
iii
iv
(c) iv
iii
ii
i
(d) iii
i
iv
ii
उत्तर-(b)
व्याख्या-
उदार लोकतंत्र - इसमें राजनैतिक पद किसी वर्ग का विशेषाधिकार
नहीं होते, बल्कि इन पदों तक पहुँचने का मार्ग अपेक्षाकृत खुला रहता है। इसमें व्यापक मताधिकार के आधार पर निश्चित अंतराल पर चुनाव होते हैं।
सैनिक शासन प्रणाली इसमें शासक की आज्ञा का पालन डर
के आधार पर किया जाता है। उदाहरण- पाकिस्तान, बर्मा, बांग्लादेश में यह प्रचलित रहा है।
राजतंत्र- इसमें राजा का शासन होता है। इस शासन व्यवस्था में राजा का कर्तव्य है कि वह प्रजाजन को ऐसी परिस्थितियाँ प्रदान करे, जिसमें वे चारों पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की सिद्धि कर सकें। प्रजा का चरित्र उन्नत करने के लिए राजा का अपना चरित्र ऊँचा होना चाहिए।
नकली लोकतंत्र राजनीतिक प्रजातंत्र का महत्व केवल इस बात
में होता है कि समाज के अन्तर्गत शक्ति के स्थान सिद्वान्त रुप में प्रत्येक के लिए खुले रहते है। शक्ति प्राप्त करने के लिए प्रतियोगिता होती रहती है और शक्ति के धारक निर्वाचकों के प्रति उत्तरदायी रहते हैं।
17. आधुनिक समाज में समाजीकरण की प्रक्रिया है :
1. विशिष्ट
2. सार्वभौम
3. यंत्रीय (या सहायक)
4. आरोपणीय
नीचे दिए कोडों से सही उत्तर का चयन करें :
कोड :
(a) 1, 2, 3
(b) 2, 3, 4
(c) 3, 4, 1
(d) 4, 2, 1
उत्तर-(a)
व्याख्या-समाजीकरण तब प्रारम्भ होता है, जब कोई बच्चा
पर्यावरण में प्रवेश करता है। वह अनेक प्रकार की परिस्थितियों के सम्पर्क में आता है, जिनके माध्यम से वह ज्ञान प्राप्त करता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बच्चा सत्ता, आज्ञा, विरोध, सहभागिता के संबंध में ज्ञान प्राप्त करता है।
बी. एल. फड़िया, राजनीति विज्ञान
18.
निम्नलिखित में से सर्वसत्तात्मक रूप की सरकार कौन
सी नहीं है?
(a) सैनिक सरकार
(b) फासिस्ट (अधिनायकवादी) सरकार
(c) साम्यवादी सरकार
(d) संसदीय रूप की सरकार
उत्तर-(d)
व्याख्या- अधिनायकतंत्र या सर्वसत्तात्मक सरकार के तीन रुप है-
(1) राजनीतिक दल का अधिनायकतंत्र या साम्यवादी सरकार भूतपूर्व सोवियत संघ एवं वर्तमान चीन में प्रचलित है।
(2) सैनिक अधिनायकतंत्र जैसा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, बर्मा इत्यादि में प्रचलित रहा है।
(3) फासिस्ट अधिनायकतंत्र जैसा कि दोनों विश्वयुद्धों के बीच की अवधि में इटली और जर्मनी में प्रचलित रहा है।
19.
प्रतिस्पर्धात्मक व्यवस्था के अन्तर्गत पार्टियों को दो मुख्य वर्गों (i) टर्नओवर एवं हेजिमोनिक (ii) वैचारिक तथा व्यावहारिक में निम्नलिखित में से किसने वर्गीकृत किया है?
(a) माइरोन वीनर तथा लापालोम्बारा
(b) जी.ए. अलमॉण्ड एवं वर्बा
(c) नील ए. मैकडोनाल्ड
(d) पीटर एच. मर्कल
उत्तर-(a)
व्याख्या-लापालोम्बारा और माइरोन वीनर ने दो प्रकार की दल पद्धतियाँ बतलायीं (1) प्रतियोगी दल प्रणाली। प्रतियोगी दल पद्धतियाँ (
प्रणाली के चार रुप हैं- (1) आधिपत्ययी वैचारिक दल पद्धतियाँ (2)
आधिपत्ययी फलमूलक दल पद्धतियाँ (3) उलटनीय वैचारिक दल
4) उलटनीय फलमूलक दल पद्धतियाँ
डॉ.बी. एल फड़िया, राजनीति विज्ञान
20.
सूची-1 को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए कोडों से सही उत्तर का चयन करें :
सूची-1 (पुस्तकें)
सूची-II (लेखक)
a. एप्रोचेस टू दी स्टडी ऑफ पोलिटिक्स
i. आर. यंग
b. डॉयनामिक्स ऑफ मॉडर्नाइजेशन
ii सी.ई. ब्लैक
c. इनफलूएंसिंग वोटर्स
ii आर. रोज़
d. स्ट्डीस इन पोलिटिकल डेवलपमेंट
iv. जे.एस.
कोड :
a
b
c
d
कोलमैन
(a) i
ii
iii
iv
(b) ii
111
1V
i
(c) iv
iii
ii
i
(d) iii
iv
ii
i
उत्तर-(a)
व्याख्या-सही कूट निम्न प्रकार से है-
(1) आर, यंग
(2) सी.ई. ब्लैक
(3) आर. रोज
21.
एप्रोचेस टू दी स्टडी ऑफ पॉलिटिक्स
डॉयनामिक्स ऑफ मॉडर्नाइजेशन
इनफ्लूएंसिंग वोटर्स
(4) जे.एस. कोलमैन- स्टडीज इन पोलिटिकल डेवलपमेंट
फेडरल इंडिया : ए डिज़ाइन फॉर चेंज नामक पुस्तक के लेखक कौन हैं?
(a) बलवीर अरोड़ा
(b) के.सी. वीयर
(c) रशीदुद्दीन खान
(d) रोनाल्ड वाट्स
उत्तर-(c)
व्याख्या-फेडरल इंडिया ए डिजाइन फॉर चेंज नामक पुस्तक के लेखक रशीदुद्दीन खान है।



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