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यू. जी. सी. नेट (दिसम्बर) परीक्षा, 2013 [राजनीति विज्ञान -द्वितीय प्रश्न-पत्र का हल]

 यू. जी. सी. नेट (दिसम्बर) परीक्षा, 2013[राजनीति विज्ञान_द्वितीय प्रश्न-पत्र का हल]


Q (1).  निम्नलिखित में से कौनसा प्लेटो की रिपब्लिक का प्रधान पात्र नहीं है?

(a) पोलिमार्कस

(b) एडीमेन्टस

(c) प्रोटागोरस

(d) ग्लोकोन

उत्तर-(c)

व्याख्या:- रिपब्लिक प्लेटो की सर्वश्रेष्ठ कृति है। जिसमें उसने दार्शनिक शासक व न्याययुक्त आदर्श राज्य की कल्पना की है। जो संवाद शैली में लिखी गयी है। सुकरात, ग्लौकॉन, पोलेमार्चस, एडेइमेंटस, सेफेलस, सोफोक्लीज़, थेमिस्टोकल्स, साइमोनाइड्स, थ्रेसिमाचस, क्लीटोफ़ोन आदि इसके प्रधान पात्र है।  

प्रोटागोरस प्लेटो के रिपब्लिक के पात्र नहीं हैं।

प्रोटागोरस (Protagoras) एक यूनानी (Greek) दार्शनिक थे। ये सोफिस्ट आंदोलन (Sophist Movement) के सबसे प्रसिद्ध विचारक थे।प्लेटो ने “Protagoras” नामक एक संवाद (Dialogue) लिखा है। 

इसमें सुकरात और प्रोटागोरस के बीच “क्या सदाचार (Virtue) सिखाया जा सकता है?” इस विषय पर चर्चा होती है। प्लेटो इस संवाद में प्रोटागोरस के सापेक्षवाद की आलोचना करते हैं और सत्य के स्थायी (objective) स्वरूप का समर्थन करते हैं।


Q (2). सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए कोडों से सही उत्तर का चयन करें :-

सूची-1 (लेखक)                           सूची-II (पुस्तकें)

a. ए. आरब्लास्टर                  i. पार्टिसिपेशन एण्ड डेमोक्रेटिक थ्योरी

b. सी.बी. मैकफर्सन              ii. मॉडल्स ऑफ डेमोक्रेसी

c. सी. पेटमैन                       iii. दी रियल वर्ल्ड ऑफ डेमोक्रेसी

d. डी.हेल्ड                           iv. डेमोक्रेसी

कोड :-

         a         b      C       d

(a)    ii         i       iii      iv

(b)    iv        iii      i       ii

(c)     ii         i        iv     iii

(d)     iii        iv     ii       i

उत्तर-(b)

व्याख्या- 

सी. पेटमैन (C. Pateman) – “Participation and Democratic Theory”

कैरोल पेटमैन एक प्रसिद्ध नारीवादी राजनीतिक सिद्धांतकार हैं। उनकी पुस्तक “Participation and Democratic Theory” (1970) में उन्होंने भागीदारीपूर्ण लोकतंत्र की अवधारणा को मजबूत किया। वे कहती हैं कि लोकतंत्र तभी सच्चा होगा जब नागरिक निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में सक्रिय भाग लें। उन्होंने रूसो और मिल के विचारों को आधुनिक संदर्भ में पुनःव्याख्यायित किया।


डी. हेल्ड (D. Held) – “Models of Democracy”

डेविड हेल्ड ने लोकतंत्र के विभिन्न मॉडलों का तुलनात्मक अध्ययन किया।  उनकी पुस्तक “Models of Democracy” (1987) में प्रतिनिधिक (representative), प्रत्यक्ष (direct), विचार-विमर्श आधारित (deliberative) आदि लोकतंत्र के मॉडल्स का विश्लेषण है। उन्होंने बताया कि लोकतंत्र एक परिवर्तनशील और बहुआयामी अवधारणा है।

सी. बी. मैकफर्सन (C.B. Macpherson) – “The Real World of Democracy”

C.B. Macpherson एक कनाडाई राजनीतिक दार्शनिक थे। उनकी पुस्तक “The Real World of Democracy” (1965) में उन्होंने पश्चिमी उदार लोकतंत्र की आलोचना की। वे मानते हैं कि मौजूदा लोकतंत्र “Possessive Individualism” पर आधारित है — जहाँ व्यक्ति को केवल अपने हितों के लिए कार्य करने वाला माना जाता है। उन्होंने Participatory Democracy (भागीदारीपूर्ण लोकतंत्र) की वकालत की।

ए. आरब्लास्टर (A. Arblaster) – “Democracy”
ए. आरब्लास्टर ने लोकतंत्र की अवधारणा का गहन विश्लेषण किया है। उनकी पुस्तक “Democracy” (1987) में वे बताते हैं कि लोकतंत्र केवल एक राजनीतिक प्रणाली नहीं, बल्कि एक सामाजिक आदर्श भी है। उन्होंने लोकतंत्र के ऐतिहासिक विकास, उदारवादी (liberal) और समाजवादी (socialist) दृष्टिकोणों की तुलना की।



Q(3). मार्क्स के लेखों का आरोही क्रम में सही अनुक्रम बताइये :-

i. काँट्रिब्यूशन टू दी क्रिटीक ऑफ पोलिटिकल इकोनोमी

ii. पॉवर्टी ऑफ फिलोसोफी

iii. थीसिस ऑन फियोरबाक

iv. कम्यूनिस्ट मैनीफेस्टो

नीचे दिए कोडों से सही उत्तर का चयन करें :-

(a) i, ii, iii, iv

(b) ii, iii, iv, i

(c) iii, ii, iv, i

(d) iv, i, ii, iii

उत्तर-(c)

व्याख्या- 

1️⃣ Theses on Feuerbach – 1845

➡️ यह मार्क्स की शुरुआती दार्शनिक रचना है।

➡️ इसमें उन्होंने लुडविग फ्यूरबाख के भौतिकवाद की आलोचना की और कहा कि

फ्यूरबाख ने केवल भौतिक जगत की व्याख्या की है,लेकिन वास्तविक कार्य यह है कि दुनिया को बदलना चाहिए।

➡️ यह मार्क्स के व्यवहारिक भौतिकवाद (Practical Materialism) की नींव रखती है।

 

2️⃣ The Poverty of Philosophy – 1847

➡️ यह मार्क्स की पिएर जोसेफ प्रूधों (Proudhon) की पुस्तक Philosophy of Poverty की आलोचना है।

➡️ इसमें उन्होंने बताया कि सामाजिक परिवर्तन केवल विचारों से नहीं, बल्कि भौतिक परिस्थितियों और वर्ग संघर्ष (Class Struggle) से होता है।

3️⃣ The Communist Manifesto – 1848

➡️ इसे कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगेल्स ने मिलकर लिखा था।

➡️ इसमें उन्होंने ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism) का सिद्धांत दिया और बताया कि इतिहास का हर युग वर्ग संघर्षों पर आधारित है। अंततः सर्वहारा (श्रमिक वर्ग) पूँजीवादी व्यवस्था को समाप्त करेगा।

➡️ प्रसिद्ध वाक्य: “Workers of the world, unite!” (सारे विश्व के मजदूरों एक हो जाओ!)

4️⃣ A Contribution to the Critique of Political Economy – 1859

➡️ यह मार्क्स का आर्थिक ग्रंथ है जिसमें उन्होंने समाज की आर्थिक संरचना (Economic Structure) और आधार (Base) तथा अधिरचना (Superstructure) का सिद्धांत स्पष्ट किया।

➡️ यह पुस्तक बाद में उनके महान ग्रंथ “Das Kapital” (1867) की आधारशिला बनी।


4. "प्रत्येक व्यक्ति के पास न्याय पर संस्थापित अनुल्लंघनीयता होती है जो सम्पूर्ण समाज का कल्याण भी दबा नहीं सकता है।" यह किसने कहा है?

(a) जॉन रॉल्स

(b) रॉबर्ट नॉज़िक

(c) फ्रेडरिक हेयक

(d) हैबरमास

उत्तर-(a)

व्याख्या- 

यह विचार जॉन रॉल्स की प्रसिद्ध पुस्तक “A Theory of Justice” (1971) से लिया गया है।

➡️ रॉल्स के अनुसार –

“प्रत्येक व्यक्ति के पास न्याय (Justice) पर आधारित ऐसी अनुल्लंघनीयता (Inviolability) होती है जिसे समाज के सामूहिक हित (Collective Welfare) के नाम पर भी तोड़ा नहीं जा सकता।”

⚖️ मुख्य अर्थ:-

1. व्यक्ति के अधिकार सर्वोपरि हैं —

किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रताओं का उल्लंघन संपूर्ण समाज के हित के लिए भी नहीं किया जा सकता।

2. न्याय सामाजिक कल्याण से पहले है —

रॉल्स कहते हैं कि न्याय (Justice), समाज के अधिकतम सुख (Utility) से भी अधिक प्राथमिक है। यह विचार उपयोगितावाद (Utilitarianism) की आलोचना करता है, क्योंकि उपयोगितावाद “सामूहिक सुख के लिए व्यक्तिगत अधिकारों का बलिदान” उचित मानता है।

3. व्यक्ति की गरिमा (Dignity) और स्वतंत्रता (Freedom) को रॉल्स ने समाज की मूल नींव माना है।

विचारधारा: उदारवादी न्याय का सिद्धांत (Liberal Theory of Justice)


5. उपयोगितावाद का संस्थापक कौन था?

(a) बैन्थम

(b) जेम्स मिल

(c) डेविड ह्यूम

(d) प्रीस्टले

उत्तर-(a)

व्याख्या- 'अधिकतम संख्या के अधिकतम हित', सम्बन्धी प्राचीन सिद्वान्त को शास्त्रीय एवं व्यवस्थित रुप देने का तथा राजनीति के क्षेत्र में इसे लागू कर लोकप्रिय एवं प्रभावशाली विचारधारा बनाने का श्रेय बैन्थम को है, अतः इसी कारण से कई विद्वान 'उपयोगितावाद' को 'बैन्थमवाद' के नाम से भी पुकारते हैं।


6. निम्नलिखित में से कौन सा लेख माओ द्वारा नहीं लिखा गया है?
(a) ऑन न्यू डेमोक्रेसी
(b) ऑन कोएलिशन गवर्नमेंट
(c) पीपुल्स वार
(d ऑन पीपुल्स डेमोक्रेटिक डिक्टेटरशिप

उत्तर-(c)

व्याख्या-माओं द्वारा रचित लेख निम्न प्रकार से हैं-
(1) ऑन न्यू डेमोक्रेसी
(2) ऑन कोएलिशन गवर्नमेन्ट
(3) ऑन पीपुल्स डेमोक्रेटिक डिक्टेटरशिप
(4) People's war - लेखक Angus colder

उत्तर-(c)
व्याख्या :-
1. "नये लोकतंत्र पर" (On New Democracy, 1940
इस लेख में माओ ने "नव-जनवादी राज्य" की अवधारणा दी – जिसमें सामंती, साम्राज्यवादी और नौकरशाही पूँजीवाद का अंत और जनता आधारित लोकतंत्र की स्थापना का विचार रखा गया।

2. "विरोधाभास पर" (On Contradiction, 1937)
इस लेख में माओ ने मार्क्सवादी द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद को चीनी संदर्भ में समझाया और सामाजिक-संघर्ष के मूल में "विरोधाभास" को बताया।

3. "प्रयोग पर" (On Practice, 1937)
यह लेख ज्ञान और व्यवहार के संबंध को समझाता है — "व्यवहार (प्रैक्टिस) ही सत्य का आधार है।"

4. "दीर्घकालिक युद्ध पर" (On Protracted War, 1938)
इस लेख में चीन–जापान युद्ध की रणनीति बताई गई — लंबे समय तक जनयुद्ध का सिद्धांत।
[Note:-People’s War (जनयुद्ध) माओ की रणनीति और सिद्धांत है,
लेकिन इस नाम से अलग लेख माओ ने नहीं लिखा। उनका वास्तविक लेख था — “On Protracted War”/दीर्घकालिक युद्ध पर]

5. "जनता के अंदर विरोधों के सही समाधान पर" (1957)
यह लेख बताता है कि जनता और दुश्मन के विरोध को अलग–अलग समझकर समाधान किया जाना चाहिए।

6. "हुनान किसान आंदोलन की जाँच रिपोर्ट" (1927)
यह रिपोर्ट चीन के किसान आंदोलन पर आधारित है और किसान–केंद्रित क्रांति का सिद्धांत प्रस्तुत करती है।

7. "संयुक्त सरकार पर" (On Coalition Government, 1945)
यह लेख युद्ध के बाद चीन में मिश्रित सरकार के विचार को समर्थन देता है।

8. "विरोधियों पर विजय कैसे प्राप्त करें" (How to Win Over Opponents)
राजनीतिक संघर्ष और जन–संगठन की तकनीक समझाने वाला लेख।




7. गाँधीजी दक्षिण अफ्रीका क्यों गए थे?
(a) दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों के निमन्त्रण पर
(b) बार-ऐट-लॉ में पढ़ने के लिए
(c) गुजराती व्यापारी का केस लड़ने के लिए
(d) परिवार के साथ दक्षिण अफ्रीका घूमने के लिए

उत्तर-(c)
व्याख्या- गाँधीजी 1893 में एक मुकदमें की पैरवी के लिए द. अफ्रीका गये। यहाँ वे 1 वर्ष के लिये गये थे, परन्तु लगभग 22 वर्ष रहे। दक्षिण अफ्रीका में गांधी जी ने नेटॉल इण्डिया कांग्रेस 1894, ट्रान्सवाल ब्रिटिश इण्डिया शोसायटी 1903 की स्थापना की।


8. 'मैक्सिकन सोशलिस्ट वर्कर्स पार्टी जिसका बाद में नाम 'मैक्सिकन कम्युनिस्ट पार्टी' किया गया किसने संस्थापित की थी?
(a) जय प्रकाश नारायण
(b) बी.आर. अम्बेडकर
(c) एम.एन. रॉय
(d) लेनिन

उत्तर-(c)
व्याख्या- मैक्सिकन सोशलिस्ट वर्कर्स पार्टी जिसका बाद में नाम 'मैक्सिकन कम्युनिस्ट पार्टी, किया गया, एम. एन. राय द्वारा स्थापित किया गया। इसके अतिरिक्त उन्होंने 1940 में 'रेडिकल डेमोक्रेटिक पार्टी' की भी स्थापना की थी।
प्रमुख कृतियाँ:-
India in Transition
The Future of Indian Politics
Reason, Romanticism and Revolution
New Humanism

9. लॉर्ड मिंटो ने सर्वाधिक 'खतरनाक व्यक्ति' के रूप में वर्णन किसका किया था?
(a) बी.जी. तिलक
(b) अरविंद घोष
(c) गाँधीजी
(d) सरदार पटेल

उत्तर-(b)
व्याख्या-लॉर्ड मिंटो ने सर्वाधिक 'खतरनाक व्यक्ति' के रुप में वर्णन अरविन्द घोष के लिए किया। अरविंद घोष विदेशी शासन के खिलाफ बल या हिंसक साधनों के प्रयोग की वकालत करते थे।

10. निम्नलिखित में से किसने आभासी या कृत्रिम प्रैशर ग्रुप्स के बारे में बात की है?
(a) जॉन ब्लॉन्डल
(b) अलमाण्ड
(c) मॉरिस ड्यूवर्जर
(d) वी.ओ. की

उत्तर-(a)
व्याख्या- ब्लॉन्डल ने दबाव समूहों का वर्गीकरण उनके निर्माण के  प्रेरक तत्वों के आधार पर किया है। उनके अनुसार प्रमुख रुप से दो प्रकार के दबाव समूह होते हैं- प्रथम, सामूदायिक दबाव समूह और द्वितीय, संघात्मक दबाव समूह। वे समूह जिनकी स्थापना के मूल में व्यक्तियों के सामाजिक संबंध होते हैं, सामुदायिक दबाव समूह कहे जाते हैं तथा वे समूह जिनकी स्थापना के पीछे किसी विशिष्ट लक्ष्य की प्राप्ति प्रेरक तत्व होता है, संघात्मक समूह कहे जाते हैं। ब्लॉन्डल ने प्रदर्शनकारी दबावसमूहों की भी चर्चा की है जो समयानुसार कृत्रिम भय से संगठित होते हैं और काम निकल जाने के बाद विघटित हो जाते हैं। जॉन ब्लॉन्डल ने प्रैशर ग्रुप्स का एक वर्गीकरण प्रस्तुत किया था, जिसमें उन्होंने कृत्रिम (Artificial/Virtual) Pressure Groups की अवधारणा बताई। इनका अस्तित्व केवल कागज़ों पर या नाम मात्र का होता है — वास्तव में ये सक्रिय नहीं होते।

आभासी / कृत्रिम प्रैशर ग्रुप्स”?
ये ऐसे प्रेशर ग्रुप होते हैं जो सिर्फ नाम मात्र में मौजूद होते हैं।
व्यवहार में सक्रिय नहीं होते।
इनका कोई वास्तविक सदस्य, गतिविधि या जनाधार नहीं होता।
अक्सर ऐसे समूह सरकार, राजनीतिक दलों या नेताओं द्वारा बनाए जाते हैं ताकि ऐसा लगे कि जनता का समर्थन मिल रहा है।
उदाहरण:-
किसी उद्योगपति द्वारा बनाया समूह जो दिखावे के लिए मजदूरों का “संघ” हो।
सरकार द्वारा बनाई गई कोई "जन समितियाँ" जो जनता का प्रतिनिधित्व करने का दावा करें पर वास्तव में निष्क्रिय हों।

11. सूची-1 को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए कोडों से सही उत्तर का चयन करें :-
सूची-I                              सूची-II
(चिंतक)                        (विचार)
a. कार्ल मार्क्स                   i. कृषक वर्ग तथा सम्पत्ति स्वामियों के बीच पैतृकवादी सम्बन्ध                                           की स्थिति
b. चाल्मर्स जॉनसन          ii. समग्र मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य
c. टेड गर                            iii. प्रक्रिया के रूप में क्रान्ति जिसके जरिये संरचनात्मक                                                        असमानताओं को समाप्त किया जा सकता है।
d. बैरिंगटन मूर                  iv. मूल्य समन्वित सामाजिक  व्यवस्था मॉडल

कोड :-
         a       b      c       d
(a)    i        iii     ii      iv
(b  ) ii        i      iii     iv
(c)   iii       iv     ii      i
(d) iv         i        iii     ii

उत्तर-(c)
व्याख्या- 
कार्ल मार्क्स —) प्रक्रिया के रूप में क्रांति व संरचनात्मक असमानताओं का अंत
मार्क्स का दृष्टिकोण:- मार्क्स के अनुसार क्रांति कोई आकस्मिक घटना नहीं होती, बल्कि ऐतिहासिक और सामाजिक प्रक्रिया होती है, जो वर्ग संघर्ष के कारण उत्पन्न होती है।
पूँजीपति बनाम श्रमिक
शोषण → संघर्ष → क्रांति
क्रांति का लक्ष्य → असमानताओं का अंत और वर्गहीन समाज

चाल्मर्स जॉनसन —) मूल्य समन्वित सामाजिक व्यवस्था मॉडल
चाल्मर्स जॉनसन का विचार:-
जॉनसन ने कहा कि समाज मूल्यों और मान्यताओं के संतुलन पर चलता है।
जब यह मूल्य-संतुलन बिगड़ता है → तंत्र संकट आता है → परिवर्तन या क्रांति होती है।
इसे कहते हैं: Value-integrated Social System Model

टेड गर —) समग्र मनोवैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य
टेड गर का Contribution:-
टेड गर की प्रसिद्ध थ्योरी — Relative Deprivation Theory
क्रांति तब होती है जब लोग महसूस करते हैं कि – जो मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला।
यह मनोवैज्ञानिक (Psychological) निराशा → आक्रोश → हिंसा / क्रांति
इसलिए यह समग्र मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण है।

बैरिंगटन मूर —) कृषक वर्ग तथा सम्पत्ति स्वामियों के पैतृकवादी संबंध
बैरिंगटन मूर का दृष्टिकोण:- उन्होंने विभिन्न देशों की राजनीतिक उत्पत्ति (Democracy / Dictatorship) का विश्लेषण किया। कृषक (Peasants) और जमीनदार (Landlords) के संबंध से राजनीतिक व्यवस्था बनती है। जहाँ कृषक और बड़े भूमि स्वामी के बीच पैतृकवादी संबंध रहे → तानाशाही प्रवृत्ति
जहाँ कृषक विद्रोह और परंपरा-विरोध रहा → लोकतंत्र

12. निम्नलिखित लेखकों में से किसने अभिजात वर्ग को दो मोटे प्रकारों में वर्गीकृत किया है?


(i) संगठित और निदेशित करने वाले अभिजात वर्ग


(ii) अनौपचारिक रूप से संगठित तथा विसरित अभिजात वर्ग


(a) विलफ्रेडो पैरेटो


(b) रॉबर्ट मिचेल


(c) गायटेनो मोस्का


(d) कार्ल मानहीम


उत्तर-(d)


व्याख्या-कार्ल मानहीम ने अभिजात वर्ग को निम्न प्रकारों में विभाजित किया है- प्रथम वर्ग के अन्तर्गत दार्शनिक, वैज्ञानिक, लेखक, कलाकार आते हैं तथा दूसरे वर्ग में मध्यमस्तरीय अभिजन आते हैं, जो पत्रकारिता, अध्यापन, प्रकाशन, आदि कार्यों में संलग्न हैं।


साहित्य भवन पब्लिकेशन्स, तुलनात्मक राजनीति


13. कौटिल्य के अनुसार, राजा के लिए उत्तम अभिशासन के सिद्धान्त कौन से हैं?


1. वैयक्तिकता का कर्तव्यों के साथ विलय।


2. आचार संहिता के साथ अनुशासित जीवन व्यतीत करना।


3. कानून एवं व्यवस्था बनाए रखना।


4. बुरे मंत्रियों को लेखकों के साथ प्रतिस्थापित करना।


नीचे दिए कोडों से सही उत्तर का चयन करें :


कोड :


(a) 1, 2 और 4


(c) 2, 3 और 4


(b) 1, 2, और 3


उत्तर-(b)


(d) 1, 2, 3 और 4


व्याख्या-कौटिल्य ने राजा के आवश्यक गुणों पर बल दिया है। वह अपने राजा को केवल सत्ता उपयोग करने वाले व्यक्ति के रुप में नहीं देखता वह उसे राजर्षि बनाना चाहता है। उसके अनुसार राजा को कुलीन, धर्म की मर्यादा चाहने वाला, कृतज्ञ, दृढ़निश्चय, विचारशील, सत्यवादी, विवेकपूर्ण, वृद्धों के प्रति आदरशील, दूरदर्शी, उत्साही, युद्ध में चतुर होना चाहिए। कौटिल्य के राजनीतिक विचार उसकी पुस्तक अर्थशास्त्र में मिलता है। जिसमें 15 अधिकरण व 150 अध्याय हैं।


डॉ. बी.एल. फड़िया, राजनीति विज्ञान


14. नीचे दो कथन दिये गये हैं, एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) का नाम दिया गया है :


अभिकथन (A) : व्यवहारवादियों के लिए, अस्पष्ट होने के बजाय गलत होना बेहतर था।


कारण


(R) : बजाय गैर-प्रासंगिक रूप से यथार्थ होने के, अस्पष्ट होना बेहतर था।


कोड :


(a) (a) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।


(b) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।


(c) (A) असत्य है, परन्तु (R) सत्य है।


(d) (A) सत्य है, परन्तु (R) असत्य है।


उत्तर-(*)


व्याख्या- व्यवहारवादी एक व्यवस्थित अध्ययन के समर्थक है अनुसंधान तथा सिद्धांत में घनिष्ठ सम्बन्ध है।


नोट- यूजीसी आयोग ने इसका उत्तर विकल्प (d) माना है।


15. ए.एफ.के. ऑर्गेन्स्की द्वारा प्रतिपादित राजनीतिक विकास की निम्नलिखित अवस्थाओं को आरोही क्रम में व्यवस्थित करें। नीचे दिए कोडों से सही उत्तर का चयन करें :


i. आदिम राष्ट्रीय एकीकरण


ii. प्रचुरता


iii. औद्योगिकीकरण


iv. राष्ट्रीय कल्याण


कोड :


(a) i, ii, iii, iv


(b) i, iii, ii, iv


(c) i, iii, iv, ii


(d) iv, ii, iii, i


उत्तर-(c)


व्याख्या-ए.एफ.के. ऑर्गेन्सकी द्वारा प्रतिपादित राजनीतिक विकास की अवस्थाओं का आरोही क्रम निम्न प्रकार से है-


(1) आदिम एकीकरण की राजनीति


(2) औद्योगीकरण की राजनीति


(3) राष्ट्रीय लोककल्याण की राजनीति


(4) समृद्धि की राजनीति


16


बी. एल. फड़िया, राजनीति विज्ञान


. सूची-1 को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए कोडों से सही उत्तर का चयन करें :


सूची-1 (सरकार का प्रकार)


सूची-II (मुख्य गुण)


a. सैनिक शासन प्रणाली ⅰ.


आदर पर आधारित


b. वंशगत शासन


ii. जबरदस्ती पर आधारित


c. नकली लोकतंत्र


iii. उदार लोकतंत्र के जैसे सावधिक चुनाव, परन्तु सत्ता अल्पतन्त्र के हाथों में रहती है।


d. उदार लोकतंत्र


iv. सरकार की प्रक्रिया में विस्तृत स्वैच्छिक सहभागिता


कोड :


a


b


C


d


(a) i


ii


iii


iv


(b) ii


i


iii


iv


(c) iv


iii


ii


i


(d) iii


i


iv


ii


उत्तर-(b)


व्याख्या-


उदार लोकतंत्र - इसमें राजनैतिक पद किसी वर्ग का विशेषाधिकार


नहीं होते, बल्कि इन पदों तक पहुँचने का मार्ग अपेक्षाकृत खुला रहता है। इसमें व्यापक मताधिकार के आधार पर निश्चित अंतराल पर चुनाव होते हैं।


सैनिक शासन प्रणाली इसमें शासक की आज्ञा का पालन डर


के आधार पर किया जाता है। उदाहरण- पाकिस्तान, बर्मा, बांग्लादेश में यह प्रचलित रहा है।


राजतंत्र- इसमें राजा का शासन होता है। इस शासन व्यवस्था में राजा का कर्तव्य है कि वह प्रजाजन को ऐसी परिस्थितियाँ प्रदान करे, जिसमें वे चारों पुरुषार्थ धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की सिद्धि कर सकें। प्रजा का चरित्र उन्नत करने के लिए राजा का अपना चरित्र ऊँचा होना चाहिए।


नकली लोकतंत्र राजनीतिक प्रजातंत्र का महत्व केवल इस बात


में होता है कि समाज के अन्तर्गत शक्ति के स्थान सिद्वान्त रुप में प्रत्येक के लिए खुले रहते है। शक्ति प्राप्त करने के लिए प्रतियोगिता होती रहती है और शक्ति के धारक निर्वाचकों के प्रति उत्तरदायी रहते हैं।


17. आधुनिक समाज में समाजीकरण की प्रक्रिया है :


1. विशिष्ट


2. सार्वभौम


3. यंत्रीय (या सहायक)


4. आरोपणीय


नीचे दिए कोडों से सही उत्तर का चयन करें :


कोड :


(a) 1, 2, 3


(b) 2, 3, 4


(c) 3, 4, 1


(d) 4, 2, 1


उत्तर-(a)


व्याख्या-समाजीकरण तब प्रारम्भ होता है, जब कोई बच्चा


पर्यावरण में प्रवेश करता है। वह अनेक प्रकार की परिस्थितियों के सम्पर्क में आता है, जिनके माध्यम से वह ज्ञान प्राप्त करता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बच्चा सत्ता, आज्ञा, विरोध, सहभागिता के संबंध में ज्ञान प्राप्त करता है।


बी. एल. फड़िया, राजनीति विज्ञान


18.


निम्नलिखित में से सर्वसत्तात्मक रूप की सरकार कौन


सी नहीं है?


(a) सैनिक सरकार


(b) फासिस्ट (अधिनायकवादी) सरकार


(c) साम्यवादी सरकार


(d) संसदीय रूप की सरकार


उत्तर-(d)


व्याख्या- अधिनायकतंत्र या सर्वसत्तात्मक सरकार के तीन रुप है-


(1) राजनीतिक दल का अधिनायकतंत्र या साम्यवादी सरकार भूतपूर्व सोवियत संघ एवं वर्तमान चीन में प्रचलित है।


(2) सैनिक अधिनायकतंत्र जैसा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, बर्मा इत्यादि में प्रचलित रहा है।


(3) फासिस्ट अधिनायकतंत्र जैसा कि दोनों विश्वयुद्धों के बीच की अवधि में इटली और जर्मनी में प्रचलित रहा है।


19.


प्रतिस्पर्धात्मक व्यवस्था के अन्तर्गत पार्टियों को दो मुख्य वर्गों (i) टर्नओवर एवं हेजिमोनिक (ii) वैचारिक तथा व्यावहारिक में निम्नलिखित में से किसने वर्गीकृत किया है?


(a) माइरोन वीनर तथा लापालोम्बारा


(b) जी.ए. अलमॉण्ड एवं वर्बा


(c) नील ए. मैकडोनाल्ड


(d) पीटर एच. मर्कल


उत्तर-(a)


व्याख्या-लापालोम्बारा और माइरोन वीनर ने दो प्रकार की दल पद्धतियाँ बतलायीं (1) प्रतियोगी दल प्रणाली। प्रतियोगी दल पद्धतियाँ (


प्रणाली के चार रुप हैं- (1) आधिपत्ययी वैचारिक दल पद्धतियाँ (2)


आधिपत्ययी फलमूलक दल पद्धतियाँ (3) उलटनीय वैचारिक दल


4) उलटनीय फलमूलक दल पद्धतियाँ


डॉ.बी. एल फड़िया, राजनीति विज्ञान


20.


सूची-1 को सूची-II के साथ सुमेलित करें और नीचे दिए कोडों से सही उत्तर का चयन करें :


सूची-1 (पुस्तकें)


सूची-II (लेखक)


a. एप्रोचेस टू दी स्टडी ऑफ पोलिटिक्स


i. आर. यंग


b. डॉयनामिक्स ऑफ मॉडर्नाइजेशन


ii सी.ई. ब्लैक


c. इनफलूएंसिंग वोटर्स


ii आर. रोज़


d. स्ट्डीस इन पोलिटिकल डेवलपमेंट


iv. जे.एस.


कोड :


a


b


c


d


कोलमैन


(a) i


ii


iii


iv


(b) ii


111


1V


i


(c) iv


iii


ii


i


(d) iii


iv


ii


i


उत्तर-(a)


व्याख्या-सही कूट निम्न प्रकार से है-


(1) आर, यंग


(2) सी.ई. ब्लैक


(3) आर. रोज


21.


एप्रोचेस टू दी स्टडी ऑफ पॉलिटिक्स


डॉयनामिक्स ऑफ मॉडर्नाइजेशन


इनफ्लूएंसिंग वोटर्स


(4) जे.एस. कोलमैन- स्टडीज इन पोलिटिकल डेवलपमेंट


फेडरल इंडिया : ए डिज़ाइन फॉर चेंज नामक पुस्तक के लेखक कौन हैं?


(a) बलवीर अरोड़ा


(b) के.सी. वीयर


(c) रशीदुद्दीन खान


(d) रोनाल्ड वाट्स


उत्तर-(c)


व्याख्या-फेडरल इंडिया ए डिजाइन फॉर चेंज नामक पुस्तक के लेखक रशीदुद्दीन खान है।



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