सूफी आन्दोलन अबू हाशिम ने सबसे पहले सूफी शब्द का प्रयोग किया था। जो लोग सूफी संतों से शिष्य ता ग्रहण करते थे, उन्हें मुरीद कहा जाता था। सूफी जिन आश्रमों में निवास करते थे, उन्हें खानकाह या मठ कहा जाता था। सूफियों के धर्मसंघ बा-शारा (इस्लामी सिद्धान्त के समर्थक) और बे-शारा (इस्लामी सिद्धान्त से बँधे नहीं) में विभाजित थे। भारत में चिश्ती एवं सुहरावर्दी सिलसिले की जड़ें काफी गहरी थीं। ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती ने भारत में चिश्ती सिलसिला की शुरुआत की । चिश्ती सिलसिला का मुख्य केन्द्र अजमेर था । चिश्ती सिलसिला के कुछ अन्य महत्वपूर्ण संत थे :- बख्तियार काकी:- ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के अध्यात्मिक उत्तराधिकारी और शिष्य। कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी दरगाह, दिल्ली। बाबा फरीद/फरीद्दुद्दीन गंजशकर :- बख्तियार काकी के शिष्य थे। बाबा फरीद की रचनाएँ गुरुग्रंथ साहिब में शामिल हैं। दो महत्वपूर्ण शिप्य थे- निजामुद्दीन औलिया एवं अलाउद्दीन साबिर । निजामुद्दीन औलिया:- अपने जीवनकाल में दिल्ली के सात सुल्तानों का शासन देखा था। इनके प्...